आँखवालों की ‘रंगभूमि’ में प्रेमचंद का ‘सूरदास’

सेवासदन (1918), वरदान (1921) और प्रेमाश्रम (1922) के बाद प्रेमचंद ‘रंगभूमि’ लेकर आए। 1922 के अक्टूबर से अप्रैल 1924 तक लिखा गया यह उपन्यास...
Premchand

प्रेमचंद, गोदान और होरी की ‘पूर्णता’ है धनिया

हर बड़े रचनाकार के साथ मुख्यत: उसकी एक कृति का नाम जुड़ा होता है। वह कृति एक तरह से उस रचनाकार की, उसकी संवेदना,...
gubbare

गुब्बारे: आठ छोटी कविताएं

गुब्बारे: 1 किसी भारी चीज से बाँध देते हैं जैसे धागा गुब्बारे का वैसे ही बाँध लेता हूँ तुमसे स्वयं को कि कहीं खो न जाऊँ जमीन और आसमान के बीच। गुब्बारे: 2 उड़ता हूँ पंछियों-सा आसमान में थामते हैं मुझे तुम्हारी आँखों...
Baba Nagarjun

हिन्दी के आधुनिक कबीर नागार्जुन

प्रगतिशील आन्दोलन यानि प्रगतिवाद के पुरोधा कवि हैं वैद्यनाथ मिश्र ‘यात्री’ अर्थात् बाबा नागार्जुन। मूलत: प्रगतिवादी होने के बावजूद नागार्जुन प्रयोगशील भी हैं और...
Main Adivasi Hoon

मैं आदिवासी हूँ

मुझे नहीं पता शहरों की चकाचौंध हवस और हिंसा क्या होती है मुझे नहीं बताया मेरे पूर्वजों ने मुझे दिखलाई गई केवल बाँह से हथेली की दूरी और यह कहकर भेज...
Nirmal Verma

‘परिंदे’/निर्मल वर्मा

हिन्दी गद्य की एक अलग लीक खींचने और आजीवन निबाहने वाले अप्रतिम साहित्यकार निर्मल वर्मा के जन्मदिन 3 अप्रैल के बहाने प्रस्तुत है उनकी...
Dhoomil

‘मोचीराम’/धूमिल

सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ (9 नवंबर 1936 – 10 फरवरी 1975), हिन्दी कविता में इतनी बुलंद, इतनी निर्भीक, इतनी खनकदार आवाज़ कोई दूसरी नहीं। आजादी...
hindi-diwas

हिन्दी: एक लघु कविता

माँ की गोद बापू की लाठी सुहागन के सिन्दूर की लाली रविशंकर के सितार का स्वर भोर का पहर नहाने के बाद की अनुभूति और हिन्दी। मेरे अन्दर बहुत अन्दर सांस लेती हिन्दी। 1994 में...
Distance

दूरियां: पाँच छोटी कविताएं

दूरियां: 1 दूरी और दूरी के बीच दूरी नहीं होती और गुजर जाती है उम्र की उम्र मिलने और मिलने के बीच। दूरियां: 2 दूरियां सताती हैं सबसे ज्यादा जब तुम होती हो करीब सबसे ज्यादा। दूरियां: 3 तुम्हें छूकर मुझमें गईं उतर दूरियां यूं छोड़ती...
Indian Woman

नारी, औरत, महिला और स्त्री

नारी: दुर्गा सप्तशती में जिसके एक सौ आठ नाम हैं जिससे अर्द्धनारीश्वर की प्रतिमा पूरी होती है खजुराहो में भांति-भांति की भंगिमाओं में खड़ी मोनालिसा के रूप में...