खत्म हुआ दुनिया का सबसे खर्चीला चुनाव

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General Elections 2019
General Elections 2019

आज सातवें चरण की 59 सीटों पर मतदान के साथ भारतीय लोकतंत्र का यज्ञ पूरा हो गया। इस चरण में बिहार की आठ सीटों – नालंदा, काराकाट, जहानाबाद, पटना साहिब, पाटलिपुत्र, बक्सर, आरा और सासाराम – के अलावा उत्तर प्रदेश की 13, पंजाब की 13, पश्चिम बंगाल की 9, मध्यप्रदेश की 8, हिमाचल प्रदेश की 4, झारखंड की 3 और चंडीगढ़ की 1 शामिल थी। इस चरण में प्रत्याशियों की कुल संख्या थी 918, जबकि मतदाताओं की संख्या थी 10.1 करोड़ और मतदान केन्द्रों की संख्या 1.02 लाख। अब सबकी निगाहें 23 मई की मतगणना पर जा टिकी है। हालांकि अपने-अपने एग्जिट पोल के साथ सारे टीवी चैनल शाम से ही आ डटे हैं।

बहरहाल, देश का निर्णय तो हम 23 मई को जान ही लेंगे। फिलहाल जानते हैं दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के 17वें लोकसभा चुनाव के संबंध में कुछ दिलचस्प बातें। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यह चुनाव दुनिया का अब तक का सबसे खर्चीला चुनाव था। जी हाँ, नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज (सीएमएस) के अनुसार सात चरणों में कराए गए इस चुनाव का कुल खर्च 50 हजार करोड़ रुपये (सात अरब डॉलर) है, जबकि 2016 में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का खर्च इससे कम करीब 6.5 अरब डॉलर था।

आपको बता दें कि सीएमएस के अनुमान के अनुसार 2014 के लोकसभा चुनाव का खर्च करीब 5 अरब डॉलर था। पांच साल बाद 2019 में हो रहे 17वें लोकसभा चुनाव में इस खर्च में 40 फीसद इजाफा हो चुका है। जरा सोच कर देखिए कि जिस देश की साठ प्रतिशत आबादी महज तीन डॉलर प्रतिदिन पर गुजारा करती है, उसमें प्रति मतदाता औसतन आठ डॉलर का खर्च क्या लोकतंत्र को मुंह नहीं चिढ़ाता।

अगर आपको उत्सुकता हो रही हो कि सबसे अधिक खर्च किस मद में होता है तो बता दें कि सर्वाधिक खर्च सोशल मीडिया, यात्राएं और विज्ञापन के मद में किया जाता है। इस बार यह खर्च कितना बेहिसाब बढ़ा उसका अनुमान इसी से हो जाएगा कि 2014 में सोशल मीडिया पर जहां महज 250 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, वहीं इस बार यह खर्च बढ़कर पांच हजार करोड़ रुपये जा पहुंचा।

आज की तारीख में शायद आपको अविश्वसनीय लगे, लेकिन बकौल चुनाव आयोग, देश के पहले तीन लोकसभा चुनावों का खर्च 10 करोड़ रुपये से कम या उसके बराबर था। इसके बाद 1984-85 में हुए आठवें लोकसभा चुनाव तक कुल खर्च सौ करोड़ रुपये से कम था। 1996 में 11वें लोकसभा चुनाव में पहली बार खर्च ने पांच सौ करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया। 2004 में 15वें लोकसभा चुनाव तक यह खर्च एक हजार करोड़ रुपये को पार कर गया। 2014 में खर्च 3870 करोड़ रुपये 2009 के खर्च से करीब तीन गुना अधिक था।

बोल डेस्क

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