हर ‘आसाराम’ के लिए जरूरी है निर्भया का भय

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Asaram
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लाखों लोगों की आस्था से खिलवाड़ करने वाले आसाराम बापू को बुधवार को उम्रकैद की सजा मिली। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका श्रेय देश भर को झकझोर देने वाली दिल्ली गैंगरेप की शिकार ‘निर्भया’ को जाता है? जी हाँ, यह निर्भया केस के बाद हुए कानूनी बदलाव का ही नतीजा है कि आसाराम को जिन्दगी भर के लिए जेल में रहने की सजा सुनाई गई है। गौरतलब है कि निर्भया केस के बाद रेप लॉ में बदलाव करके उसके बेहद सख्त बना दिया गया था। यह बदलाव 2 अप्रैल 2013 से लागू हुए। आसाराम के खिलाफ मामला अगस्त 2013 में दर्ज हुआ और यही कारण है कि उसे नए कानून के तहत सजा मिली।

आसाराम को रेप की जिन धाराओं में जीवन भर जेल की सजा हुई है, वे तमाम धाराएं और कानून निर्भया केस के बाद जोड़े गए थे। इसके तहत गैंगरेप में 20 साल से लेकर उम्रकैद यानि मौत होने तक जेल में रखने का प्रावधान किया गया था। वहीं, ऐसा शख्स रेप करता है, जिस पर पीड़िता भरोसा करती थी तो ऐसे मामले में 10 साल से लेकर ताउम्र जेल का नियम बनाया गया। इन दोनों ही धाराओं में आसाराम को सजा दी गई है।

इससे पहले, गैंग रेप के मामले में अधिकतम उम्रकैद का ही प्रावधान था। साथ ही सरकार को 14 साल जेल काटने के बाद सजा में छूट देने का भी अधिकार था। लेकिन जिन दो धाराओं में आसाराम को उम्रकैद दी गई है, उसमें उम्रकैद का मतलब स्वाभाविक तरीके से मृत्यु होने तक जेल से है और ऐसे मामले में सरकार सजा में छूट भी नहीं दे सकती। इस तरह हम कह सकते हैं कि ये ‘निर्भया’ ही है, जिसने आसाराम को उसके अंजाम तक पहुँचाया। उम्मीद की जा सकती है कि आस्था से खेलने वाले हर ‘आसाराम’ को अब निर्भया का भय बना रहेगा। बहुत जरूरी है ये।

बोल डेस्क

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