योग को ‘खेल’ मानने में हर्ज ही क्या है?

0
169
Saudi Arabia approves yoga as a form of Sport
Saudi Arabia approves yoga as a form of Sport

एक ओर जहां भारत में योग और धर्म को लेकर अनावश्यक विवाद छिड़ा है, वहीं दूसरी ओर इस्लामिक देश सऊदी अरब में योग को एक खेल के तौर पर आधिकारिक मान्यता मिल गई है। जी हाँ, सऊदी अरब की ट्रेड ऐंड इंडस्ट्री मिनिस्ट्री ने स्पोर्ट्स ऐक्टिविटीज के तौर योग सिखाने को आधिकारिक मान्यता दे दी है। सऊदी अरब में अब लाइसेंस लेकर योग सिखाया जा सकेगा।

इस संदर्भ में एक बेहद खास बात यह रही कि रूढ़िवादी माने जाने वाले सऊदी में योग को खेल के तौर पर मान्यता दिलाने का श्रेय नोफ मारवई नाम की महिला को जाता है। बता दें कि नोफ को सऊदी अरब की पहली योग प्रशिक्षक का दर्जा भी मिल गया है। देखा जाय तो वो इसकी सच्ची हकदार थीं। उन्होंने सऊदी में योग को खेल के तौर पर मान्यता दिलाने के लिए लंबे समय तक अभियान चलाया था।

अरब योगा फाउंडेशन की फाउंडर नोफ ने इस बाबत अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि “योग जिसका मतलब जोड़ होता है, यह शरीर से मन के मिलन, भावनाओं और आत्मा के मिलन का अभ्यास है। यह एक देश से होते हुए वैश्विक स्तर पर पहुंचते हुए सऊदी अरब भी पहुंच चुका है। इसने कट्टरपंथी विचारधारा के बंधनों को तोड़ दिया है।” अपने पोस्ट में उन्होंने भारत सरकार और वाणिज्य दूतावास को ‘असीमित सहायता’ के लिए धन्यवाद भी दिया है।

बहरहाल, आज जरूरत इस बात की है कि हर देश में नोफ जैसे हौसले वाले लोग हों ताकि योग का परचम पूरे विश्व में एक समान लहराए। खेल के रूप में ही सही, योग को अपनाया जाना जरूरी है। और इसमें आखिर हर्ज भी क्या है? गहरे उतरकर देखें तो खेल भी तो योग ही है। सच्चा और सफल खिलाड़ी वही होता है, जो शरीर और मन को एक साथ साध पाता है। योग भी तो हमें ठीक यही बताता है। फर्क बस नजरिये का है। ये ना भूलें कि जिसे आप 6 देख रहे हों, वो दूसरे के लिए 9 भी हो सकता है।

चलते-चलते बता दें कि 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में योग को वैश्विक तौर पर स्वीकृति मिली थी और 21 जून को हर साल विश्व भर में योग दिवस मनाया जाता है।

बोल बिहार के लिए रूपम भारती

Comments

comments

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here