राजनीतिक शुचिता के ‘शिखर’ का सम्मान

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Nitish Kumar after receiving first Mufti Award in J&K
Nitish Kumar after receiving first Mufti Award in J&K

सोमवार को जम्मू-कश्मीर की शीतकालीन राजधानी जम्मू के जोरावर सिंह ऑडिटोरियम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री व जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को प्रथम ‘मुफ्ती अवार्ड फॉर प्रोबिटी इन पॉलिटिक्स एंड पब्लिक लाइफ’ से सम्मानित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली जेएंडके पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (जेकेपीडीपी) की ओर से पार्टी के संस्थापक, पूर्व केंद्रीय मंत्री और दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे मुफ्ती मुहम्मद सईद की स्मृति में दिया गया। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एएन वोहरा के हाथों मिले इस पुरस्कार को नीतीश कुमार ने वहां की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, भारतीय मूल के ब्रिटिश अर्थशास्त्री व नेता लॉर्ड मेघनाद देसाई, बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी एवं जेडीयू नेता संजय झा समेत कई गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी में ग्रहण किया।

इस पुरस्कार के संदर्भ में आगे बात करें, उससे पहले उस पत्र की चर्चा जरूरी है जो जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस पुरस्कार की बाबत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लिखा था। अपने इस बेहद खास पत्र में उन्होंने कहा है, “मैं पूरी ईमानदारी से यह बात कह रही हूं कि राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन की शुचिता के मामले में देश में आपसे बेहतर कोई नहीं जिसे इस सम्मान से नवाजा जाए।” उनकी यह टिप्पणी ना केवल नीतीश कुमार के लिए बल्कि 11 करोड़ बिहारियों के लिए सम्मान की बात है। इस टिप्पणी का महत्व तब और भी ज्यादा बढ़ जाता है जब ठीक इसी समय राज्य के एक बड़े नेता को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल की सजा मिली हो और एक दलविशेष द्वारा उस सजा को ‘शहादत’ की तरह पेश करने की कोशिश की जा रही हो।

महबूबा मुफ्ती ने अपने पत्र में नीतीश कुमार के जम्मू-कश्मीर कनेक्शन की भी याद दिलाई। उन्होंने लिखा, “मुझे याद है कि आपने रेल मंत्री के रूप में घाटी के लिए पहल की थी और बारामूला तथा अनंतनाग के लिए रेल लाइन का शिलान्यास किया था।” कहने का अर्थ यह कि एक अलग तरह का संघर्ष झेल रहे उस राज्य के दिल-दिमाग पर नीतीश कुमार के अवदान की छाप तब से है। ध्यान दिला दें कि केन्द्र में वीपी सिंह सरकार के दौरान मुफ्ती मोहम्मद सईद और नीतीश कुमार ने साथ काम किया था।

बहरहाल, कहने की जरूरत नहीं कि बिहार में न्याय के साथ विकास के अपने संकल्प को शतप्रतिशत समर्पण और तन्मयता से जमीन पर उतारने में जुटे नीतीश कुमार ने गुड गवर्नेंस का एक नया मानक स्थापित किया है। इसके साथ ही बिहार में चलाए जा रहे शराबबंदी, दहेजबंदी, बालविवाहबंदी और कन्या-सुरक्षा जैसे समाज-सुधार अभियानों ने उनके व्यक्तित्व को ‘राजनीतिक संत’ जैसा आयाम दे दिया है। आज वो निर्विवाद रूप से राजनीतिक शुचिता के शिखर और उसके पर्याय हैं और इस सम्मान के लिए उनके चयन ने बिहार की छवि को एक नई ऊँचाई प्रदान की है।

नीतीश कुमार को यह सम्मान मिलना साबित करता है कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी बिहार में आज संभावना देखी जा रही है। गठबंधन सरकार की जटिल परिस्थितियों और विपक्ष के तौर पर ठीक ‘कंट्रास्ट’ से जूझते हुए नीतीश कुमार का राज्य के लिए एक के बाद उपलब्धियां हासिल करना और उसे संभावना के साथ ही सराहना के योग्य बनाना उनके कद को और बढ़ा देता है। यह उनका अथक प्रयत्न ही है कि कभी जातिवाद, अपराध और भ्रष्टाचार के अंधेरे में सफर करने वाला बिहार आज नई भोर की किरण देख रहा है। हाल के दिनों में शराबबंदी की सफलता ने राज्यवासियों में यह आत्मविश्वास भर दिया है कि नीतीश कुमार जैसा नेतृत्वकर्ता हो तो असंभव दिखने वाला लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। अब जरूरत इस बात की है कि इस माहौल को गतिमान रखते हुए ‘पॉजिटिव एप्रोच’ और नए संकल्प के साथ सरकार और हम एक साथ कदम बढ़ाएं।

‘बोल बिहार’ के लिए डॉ. ए. दीप

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