सजा, सियासत और लालू

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Lalu Prasad Yadav
Lalu Prasad Yadav

आखिर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को सजा मिल ही गई। आज रांची में सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें चारा घोटाले के एक मामले में साढ़े तीन साल की सजा सुनाई। इसके अलावा कोर्ट ने उन पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। अहम बात यह कि इस फैसले के बाद लालू समेत तमाम दोषियों को जमानत नहीं मिलेगी। इसके लिए उन्हें उच्च अदालत में जाना होगा।

बहरहाल, देवघर के सरकारी कोषागार से 1990-1994 के बीच अवैध तरीके से 89.27 लाख रुपये निकालने के मामले में आए इस बड़े फैसले को लालू समेत सभी 16 दोषियों ने रांची की बिरसा मुंडा जेल में विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिए एक साथ बैठकर सुना। गौरतलब है कि 24 दिसंबर 2017 को सीबीआई जज ने इस मामले में लालू प्रसाद यादव समेत 16 लोगों को दोषी करार दिया था। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा समेत छह आरोपियों को बरी कर दिया गया था। जो सजा आज सुनाई गई, उसका फैसला 3 जनवरी को ही आना था पर तारीख एक-एक दिन कर टलती जा रही थी।

इधर सजा का फैसला आने से पहले ही पटना में आरजेडी की ओर से बुलाई गई बैठक में विधायक समेत पार्टी के सभी पदाधिकारी मौजूद थे। बैठक में लालू यादव की चिट्ठी नेताओं में बांटी गई। पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने प्रेस वार्ता में बताया कि फैसला आने के बाद लालू यादव के जेल से लिखे खत को पार्टी के लोग जन-जन तक पहुंचाएंगे। तेजस्वी ने कहा कि हम फैसले के खिलाफ उच्च अदालत जाएंगे। वहीं लालू के बड़े बेटे व पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव ने कहा कि ‘हम पूरी तरह आश्वस्त हैं कि उन्हें (लालू यादव) बेल मिल जाएगी। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।’

हालांकि फिलहाल जो केस की स्थिति है उस हिसाब से लालू प्रसाद यादव का तुरंत जेल से निकल पाना आसान नहीं है। अभी इस केस में सजा मिलने के अलावा चार और केस में कोर्ट का फैसला आना है। सूत्रों के अनुसार जनवरी महीने में ही उन सभी मामले में अगर लालू प्रसाद को सजा मिलती गई तो सबमें अलग-अलग सजा मिलेगी और सबमें अलग-अलग जमानत लेनी होगी।

कहने की जरूरत नहीं कि लालू की अनुपस्थिति में न केवल आरजेडी बल्कि पूरे बिहार की सियासत में कई परिवर्तन देखने को मिलेंगे। चाहे आरजेडी हो, चाहे उसके विरोध में खड़ी जेडीयू और भाजपा, या फिर उसकी सहयोगी पार्टी कांग्रेस, समीकरण तमाम दलों के बदलेंगे। इन सबके बीच सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि जनता का रुख इस पर क्या होता है!

बोल डेस्क

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