जरूरी है वी. शांताराम को जानना

0
66
V Shantaram
V Shantaram

चार्ली चैप्लिन जब अपनी पसंदीदा फिल्म का जिक्र करते थे, तो उनका नाम लेते थे। शाहरुख खान ने अगर बेटे आर्यन को खासतौर पर कोई हिंदी फिल्म देखने की नसीहत दी है, तो वो इनकी बनाई फिल्म है। ये वो हैं जिन्होंने भारतीय सिनेमा को पूरी तरह बदल दिया। ये हैं भारतीय सिनेमा के प्रतीक पुरुष वी. शांताराम, 18 नवंबर जिनका जन्मदिन है, 116वां जन्मदिन।

एक सिनेमा प्रेमी के लिए अगर कुछ लोगों को जानना बहुत जरूरी है, तो वी. शांताराम उनमें एक अनिवार्य नाम हैं। उन्होंने फिल्में बनाईं और वो फिल्में सिर्फ चली नहीं, बल्कि हमेशा के लिए अमर हो गईं। आप चाहे ‘दो आंखें बारह हाथ’ जैसी क्लासिक की बात करें या ‘डॉ. कोटनिस की अमर कहानी’, ‘नवरंग’ और ‘झनक-झनक पायल बाजे’ की, सभी फिल्मों में एक फिल्मकार का जुनून नजर आता है। फिर शांताराम को सिर्फ एक फिल्मकार भी नहीं कहा जा सकता, वह सिनेमा की एक जीती-जागती संस्था थे, जिसे डायरेक्शन-प्रोडक्शन से लेकर एक्टिंग, एडिटिंग, फोटोग्राफी से लेकर राइटिंग तक सब कुछ बखूबी आता था।

1927 में उनकी पहली फिल्म आई थी ‘नेताजी पाल्कर’ और 1929 में उन्होंने प्रभात फिल्म कंपनी बनाई। इसके बाद फिल्मों का जो सिलसिला शुरू हुआ, वो आखिर तक जारी रहा। उन्होंने मराठी और हिंदी दोनों भाषाओं में फिल्में बनाईं। उनकी बनाई मराठी फिल्म ‘मनूस’ उन गिनी-चुनी भारतीय फिल्मों में शामिल है, जिन्हें दुनिया के सबसे मशहूर हास्य अभिनेता चार्ली चैप्लिन पसंद करते थे।

वी. शांताराम जितना अपनी पीढ़ी के लिए प्रासंगिक थे, उतना ही आज की पीढ़ी के लिए। बीते दिनों खबर आई थी किंग खान शाहरुख के बेट आर्यन खान न्यूयॉर्क में सिनेमा की पढ़ाई कर रहे हैं। इस पर जब शाहरुख से पूछा गया कि वो अपनी तरफ से आर्यन को क्या टिप्स दे रहे हैं तो उन्होंने कहा था कि मैंने आर्यन को ‘दो आंखे बारह हाथ’ जैसी हिंदी फिल्मों के फोल्डर बनाकर दिए हैं और कहा कि वो इन फिल्मों को जरूर देखें।

चलने से पहले थोड़ी बात बातें ‘दो आंखें बारह हाथ’ की। 1957 में बनी ये फिल्म शांताराम की कल्ट क्लासिक फिल्मों में शामिल है। इस फिल्म में कहानी थी छह अपराधियों की, जिन्हें एक आदर्शवादी जेलर की निगरानी में रखा गया था। इस जेलर का रोल भी शांताराम ने खुद ही निभाया था। इस फिल्म का गाना ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’ आज भी कई स्कूलों की मॉर्निंग प्रेयर का हिस्सा है। इसे वसंत देसाई ने कंपोज किया था और लता मंगेशकर ने गाया था।

बोल डेस्क [न्यूज 18 द्वारा प्रकाशित एक आलेख पर आधारित]

Comments

comments

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here