भूख से बदनामी?

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Koyali Devi
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झारखंड के सिमडेगा जिले में कथित तौर पर भुखमरी से मरने वाली लड़की की मां से मारपीट की ख़बर आ रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार रात जिले के करिमाती गांव में रहने वाली कोयली देवी के साथ गांव की कुछ महिलाओं ने कथित तौर पर मारपीट की। महिलाओं का आरोप था कि बेटी संतोषी कुमारी की भुखमरी से मौत का आरोप लगाकर कोयली देवी ने गांव का नाम बदनाम किया है।

इसके बाद शनिवार सुबह कोयली देवी पास के गांव में रहने वाली सामाजिक कार्यकर्ता तारामणि साहू के घर चली गईं। साहू ने बताया, ‘कोयली देवी के साथ मारपीट करने के बाद उन्हें जबरन गांव से निकालने की कोशिश की गई। उनके सामान को घर से बाहर फेंक दिया गया था। शनिवार सुबह सुरक्षा देने की मांग करते हुए हमने इसकी सूचना उपजिलाधिकारी को दे दी है।’

सिमडेगा के उप संभागीय पुलिस अधिकारी एके सिंह ने कहा, ‘हमने जलडेगा थाना इंचार्ज और ब्लॉक विकास अधिकारी को उनके गांव भेज दिया है। पता लगा कि कोयली देवी अपने घर में नहीं हैं। सुरक्षा का आश्वासन देकर उन्हें साहू के घर से वापस उनके घर लाया गया है।’

उन्होंने आगे कहा, ‘घर में तोड़फोड़ के कोई निशान नहीं मिले हैं। शुक्रवार रात कोयली देवी के घर गांव की कुछ महिलाएं गई थीं तो उनकी बहस हो गई। भुखमरी से बेटी की मौत का दावा करने वाली कोयली देवी पर महिलाओं ने गांव का नाम बदनाम करने का आरोप लगाया था।’

सिंह कहते हैं, ‘अभी तक कोयली देवी ने किसी महिला की पहचान नहीं की है। अगर वह कोई औपचारिक शिकायत करती हैं तो हम एफआईआर दर्ज करेंगे। हम उनके घर की सुरक्षा भी बढ़ाएंगे। अभी के लिए जलडेगा थाना इंचार्ज और ब्लॉक विकास अधिकारी उनके घर पर तैनात हैं।’

पिछले दिनों मीडिया में आई ख़बरों में कोयली देवी ने बताया था कि राशन कार्ड को आधार कार्ड से नहीं जोड़ पाने की वजह से पिछले आठ महीने से उन्हें सरकारी राशन नहीं मिल रहा था। इस वजह से उनकी 11 साल की बेटी संतोषी कुमारी ने 8 दिन से खाना नहीं खाया था और बीते 28 सितंबर को भूख से उसकी मौत हो गई।

कोयली देवी ने कहा था कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले अनाज की दुकान पर जब मैं चावल लेने गई तो मुझे बताया गया कि राशन नहीं दिया जाएगा। मेरी बेटी ‘भात-भात’ कहते मर गई। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों ने कोयली देवी की बेटी की मौत भूख से नहीं बल्कि मलेरिया से होने की बात कही है।

बहरहाल, ये तो थी ख़बर। चलने से पहले इस ख़बर से जुड़े दो अहम सवाल। पहला, क्या भूख से सचमुच किसी की बदनामी हो सकती है? दूसरा, अगर हो सकती है तो किसकी – भूख से बिलखकर मरने वाले की, मरने से पहले उसकी भूख की सुध न लेने वाले गांव की, जीने के अधिकार तक की रक्षा न करने वाली सरकार की, या फिर इंसानियत पर भारी पड़ते ‘आधार’ की?

बोल डेस्क

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