भाजपा सबसे अमीर, कांग्रेस ठीक पीछे

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BJP-Congress
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पैसे का महत्व हर युग में रहा है, लेकिन आज के समय में इसकी ताकत बेहिसाब बढ़ गई है। आज यह पैसा नीयत, नीति, नियम, नैतिकता, न्याय और यहां तक कि नियति तक को बदलने की सामर्थ्य रखती है। जब पैसे की इस ताकत से बड़े-से-बड़ा और छोटे-से-छोटा हर आदमी वाकिफ है, तो भला राजनीतिक पार्टियां इससे कैसे अछूती रहें। यह संयोग से कुछ अधिक है कि जब-जब चुनाव नजदीक आता है, तब-तब सभी पार्टियों की संपत्ति में इजाफा हो जाता है। क्यों होता है, यह किसी से छिपा नहीं।

दरअसल तमाम राजनीतिक पार्टियां चुनाव आने के लगभग साल भर पहले से पैसा इकट्ठा करना शुरू कर देती हैं। इनकम टैक्स विभाग चाहे जितने नियम बना लें, राजनीतिक पार्टियां अपनी आमदनी को उसमें फिट करने की ‘कला’ बखूबी जानती हैं। आज चुनाव प्रणाली के लिए पैसे की ये ताकत कितनी बड़ी चुनौती बन चुकी है, इस पर बात करना ही बेकार है। बात तो इस पर होनी चाहिए कि राजनीतिक पार्टियों की फंडिंग पारदर्शी कैसे हो।

बहरहाल, यह समस्या इतनी गंभीर है कि इस पर राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए। फिलहाल तो आप यह जानें कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सबसे अमीर पार्टी कौन है और उसके पास कितनी सम्पत्ति है? आपको बता दें कि हाल के वर्षों में तेजी से अपनी राजनीतिक हैसियत बढ़ाकर देश की सत्ता पर काबिज होने वाली पार्टी भाजपा ने कांग्रेस से सबसे बड़ी और उसी के साथ सबसे अमीर होने का दर्जा छीन लिया है। यह तथ्य ‘रिसर्च असोसिएशन फॉर डेमोक्रटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) और वेस्ट बंगाल इलेक्शन वॉच की तरफ से कोलकाता में सोमवार को ‘अनैलेसिस ऑफ असेट्स ऐंड लायबिलिटीज ऑफ नैशनल पार्टीज फाइनैंशल ईयर 2004-5 से 2015-16’ के नाम से जारी रिपोर्ट से सामने आई है।

एडीआर की इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 सालों में भाजपा की सम्पत्ति 627 प्रतिशत बढ़कर 122.93 करोड़ रुपये से 893 करोड़ रुपये हो गई है। यह आंकड़ा 2004-05 से 2015-16 के बीच का है। जबकि इसी समय में कांग्रेस की सम्पत्ति 167.35 करोड़ रुपये से बढ़कर 758.79 करोड़ रुपये हो गई, यानि इन 10 सालों में उसकी सम्पत्ति में 353.41 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

बता दें कि एडीआर ने इस रिपोर्ट में विश्लेषण के लिए कुल 7 पार्टियों द्वारा चुनाव आयोग और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में जमा किए ऑडिटेड अकाउंट का इस्तेमाल किया गया है। वे पार्टियां हैं: भारतीय जनता पार्टी, इंडियन नेशनल कांग्रेस, एनसीपी, बसपा, सीपीआई, सीपीएम और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस।

बोल बिहार के लिए डॉ. ए. दीप

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