अविस्मरणीय हैं श्रीराम

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Lord Rama
Lord Rama

जैसे राधाकृष्ण की युगल जोड़ी को होना घर में प्यार बढ़ाता हे, वैसे ही राम दरबार का घर-दुकान में होना शक्ति का संचार करता है। यूं तो राम-रावण युद्ध को बीते बारह हजार वर्ष हो चुके हैं, फिर भी बारह हजार साल वर्ष पूर्व जल समाधि लेने वाला व्यक्तित्व आज तक याद किया जा रहा है। बल्कि यह कहना ज्यादा सही होगा कि हमारे रोम-रोम में बसे हैं श्रीराम! वस्तुतः यह आम राय होने के बावजूद कि ‘सच्चाई का जमाना नहीं रहा’, इस मृत्यु सागर रूपी संसार में यह सनातन सत्य ही है, जो पुराना नहीं पड़ रहा है, क्योंकि श्रीराम के दिए सिद्धांत बारह हजार वर्ष बाद भी हम सभी के लिए समाधान साबित हो रहे हैं।

सीता जी के अपहरण के समय उनके चैदह वर्ष के वनवास में मात्र छह महीने शेष रह गए थे। लेकिन, उन्होंने राजगद्दी की लिप्सा की बजाय मात्र आत्मबल के सहारे एक महाशक्तिशाली राजा को परास्त करने का निर्णय लिया। लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा की नाक काटना युद्ध का कारण बना। नाम तो काटी लक्ष्मण ने, लेकिन प्रभु ने यह अपने ऊपर ले लिया। जिस कैकेयी ने मातृत्व पद का दुरुपयोग कर इरादतन उन्हें फंसाया, चैदह वर्ष की सजा काटने के बाद श्री राम ने सबसे पहले उन्हीं कैकयी माता के चरण स्पर्श किए। समुद्र पार करके रावण को मारना… और उसी युद्ध क्षेत्र में ही माया की व्याख्या – ‘तेरा-मेरा ही माया की जड़ है’ – करने वाले निस्पृह संत श्रीराम का व्यक्तित्व एक ‘चरित’ बन गया। इसीलिए योगीजन श्रीराम में रमण करते हैं।

श्रीराम के गुणों को की थाह नहीं है। वे वादा निभाने वाले (‘प्राण जाए पर वचन न जाए’) विनम्रवीर हैं, जिन्होंने एक पत्नी प्रथा की स्थापना की। सामूहिक विकास द्वारा लोकतंत्र की नींव रखने के कारण श्रीराम आज भी प्रासंगिक हैं। वे भावुक इतने हैं कि लता-पत्तियों से सीता जी के बारे में बतियाते हैं। पतित पावन हैं यानि पतितों का उद्धार करने वाले हैं। सेवक राजा हैं, वेश बदलकर जनता की प्रतिक्रिया जानते हैं। राम राज्य की यह परिपाटी निभाने वाले प्रशासक आज भी प्रशंसा पाते हैं। कलिमलहरण हैं। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में बार-बार श्रीराम के प्रभाव से कलियुग के मल का हरण होने की बात कही है। अविस्मरणीय हैं श्रीराम!

स्वामी विवेकानंद ने श्रीराम के व्यक्तित्व को समझने के लिए सूत्र बताया है कि श्रीराम के चरित को समझने के लए अपने कामकाज में राम तत्व का समोवश करो। इस तरह उनके चरित (गुणों) की स्पष्ट प्रतीति होगी और तुम्हारे कामकाज में राम तत्व का समावेश हो जाएगा तो विजय सुनिश्चित है।

बोल डेस्क [‘हिन्दुस्तान’ में डॉ. अनिरुद्ध सारस्वत]

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