बुलेट ट्रेन… मुफ्त में!

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Bullet Train in India
Bullet Train in India

बुलेट ट्रेन… भारतीय रेल के 164 साल पुराने इतिहास का नवीनतम अध्याय… रफ्तार के रूप में तरक्की के एक नए युग की शुरुआत… न्यू इंडिया और मेक इन इंडिया के सपनों की उड़ान का नया प्रस्थान बिन्दु। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे के साथ भारत के दो औद्योगिक शहरों  मुंबई और अहमदाबाद को करीब लाने वाली उच्च तकनीक की इस महत्वाकांक्षी परियोजना की नींव रखी। पर देश ने जहां एक ओर दिल खोल कर इस परियोजना का स्वागत किया है, वहीं बुलेट ट्रेन के सपने और रेलवे के वर्तमान ढांचे के अंतर्द्वंद्व को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। इस परियोजना से जुड़ा एक बड़ा पहलू यह भी है कि जापान इसके लिए हमें तकनीक के साथ-साथ 50 साल के लिए 0.1 प्रतिशत सालाना ब्याज पर 88 हजार करोड़ का ऋण भी दे रहा है, जिसकी व्याख्या प्रधानमंत्री मोदी इस रूप में कर रहे हैं कि एक तरह से बुलेट ट्रेन हमें मुफ्त में मिल रही है। उनकी इस व्याख्या को लेकर लोग एकमत नहीं हैं। क्यों नहीं हैं, उनके क्या तर्क, कौन-से प्रश्न और कैसी चिन्ताएं हैं, यह जानना और समझना भी जरूरी है। इसी आलोक में अनिल सिंह की फेसबुक वॉल से लिया गया यह अंश प्रस्तुत है। – डॉ. ए. दीप

प्रधानमंत्री मोदी कह रहे हैं कि भारत को बुलेट ट्रेन एक तरह से मुफ्त में मिल रही है। सच है कि जापान भारत को इस प्रोजेक्ट के लिए कुल लागत के लगभग 4/5 हिस्से यानि 88,000 करोड़ रुपये का लोन 0.1% सालाना ब्याज दर पर दे रहा है। लेकिन मोदीजी ने देश को यह नहीं बताया कि जापान में ब्याज दर इस समय ऋणात्मक (-)0.1% चल रही है। यानि बैंक उधार लेने वाले ग्राहक को 0.1% ब्याज देता है। भारत में वहां के बैंक इस प्रोजेक्ट के लिए लोन दे रहे हैं, जिस पर उन्हें 0.1% ब्याज मिलेगा। यानि, 0.2% का फायदा। वह भी पूरे 50 साल तक।

वैसे भी बुलेट ट्रेन की जरूरत अभी भारत को उतनी नहीं थी, जितनी कि जापान को थी। उसे अपनी टेक्नोलॉजी बेचनी थी। इससे उसकी कई कंपनियों को भारी-भरकम धंधा मिल जाएगा। साथ ही उसकी ठहरी हुई अर्थव्यवस्था में थोड़ी गति आ जाएगी। और, फिर प्रधानमंत्री जी। यह प्रोजेक्ट मुफ्त में कैसे पड़ेगा? सरकार चाहे किसी पार्टी की रहे, भारतीय अवाम के धन से 88,000 करोड़ रुपये के ऋण का मूलधन को चुकाना ही पड़ेगा! 3,000 रुपये का टिकट ले सकने वालों का सफर आसान होगा और उस प्रोजेक्ट को बनाने का खर्च हर भारतवासी को उठाना पड़ेगा। यह तो मुफ्त के सौदे में जापान की मौज है।

बोल बिहार [अनिल सिंह की फेसबुक वॉल से साभार]

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