खतरे में विश्वशांति

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Kim Jong-un with Army Personnel
Kim Jong-un with Army Personnel

यह अफसोस और चिन्ता का विषय है कि कोरियाई प्रायद्वीप में पहले से मौजूद तनाव के वातावरण में डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (उत्तर कोरिया) के परमाणु परीक्षण ने और इजाफा कर दिया है। यह ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिका और उत्तर कोरिया के रिश्ते पहले से तनावपूर्ण थे और इसमें जरा सा भी इजाफा दुनिया के लिए भयावह हो सकता था। यह समय है जब उत्तर कोरिया द्वारा किए गए ताजा परमाणु परीक्षण से उत्पन्न हालात में शेष दुनिया के साथ खड़े होकर इसकी तीव्र भर्त्सना की जाए।

जो कुछ हुआ उसके संकेत बहुत स्पष्ट हैं। उत्तर कोरिया प्रायद्वीप में अपनी दादागिरी दिखाना चाहता है और इसके लिए तानाशाह किम जोंग सत्ता पर काबिज होने के बाद से ही लालायित दिख रहे हैं। दुर्भाग्यवश यह सब जारी रहा, तो नतीजे अच्छे नहीं होंगे। क्षेत्र में हथियारों की अनियंत्रित होड़ बढ़ेगी और दक्षिण कोरिया द्वारा मिसाइलों की तैनाती व अन्य सैन्य संपत्तियों पर निर्भरता पहले ही इसके संकेत दे चुकी है। इस सबके मद्देनजर यह लगभग तय है कि जापान भी इस माहौल में अपनी रक्षा के बहाने इसी तरह सोचने को मजबूर होगा और स्वाभाविक रूप से क्षेत्र का खतरा बढ़ जाएगा।

परीक्षण से उपजे हालात का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यही है कि इसने प्रायद्वीप को परमाणु मुक्त बनाने की दिशा में चल रहे अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों को बहुत बड़ा झटका दिया है। उत्तर कोरिया की इस मनमानी के बाद अब जरूरी है कि परमाणु मुक्त क्षेत्र बनाने की दिशा में अंतर्राष्ट्रीय प्रयास दोगुने जोर-शोर से किए जाएं, लेकिन इसके नतीजे भी तभी सकारात्मक हो सकते हैं, जब चीन और जापान भी इसी स्तर के धैर्य के प्रदर्शन के साथ एक पहल करते दिखें। समस्या के पूरी तरह निराकरण के लिए छह देशों के बीच बातचीत फिर से शुरू करने का भी यह सही समय है।

सच तो यही है कि इस समस्या का समाधान सैन्य विकल्पों में तलाशना समझदारी भरा और दूरदर्शितापूर्ण नहीं होगा। ऐसे में, उचित यही लगता है कि हम परमाणु अप्रसार के अपने पुराने इरादे पर लौटें, उस व्यवस्था की खामियों को परखें और फिर से एक नई समझदारी भरी राह पर चलने का संकल्प लें।

बोल डेस्क [‘द डेली स्टार’, बांग्लादेश से साभार]

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