जेडीयू ने शुरू की शरद पर निर्णायक कार्रवाई

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Sharad Yadav-Nitish Kumar
Sharad Yadav-Nitish Kumar

जेडीयू से अलग राह पर निकल चुके पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता खत्म कराने की कवायद पार्टी ने शुरू कर दी। राज्यसभा में जेडीयू के नेता आरसीपी सिंह और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव संजय झा ने उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू से भेंटकर उन्हें जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पत्र सौंपा। पत्र में शरद और अनवर की राज्यसभा सदस्यता खत्म करने की बात कही गई है।

गौरतलब है कि ये दोनों नेता पार्टी लाईन से अलग जाकर 27 अगस्त को पटना में आयोजित आरजेडी की भाजपा भगाओ देश बचाओ रैली में शामिल हुए थे। इनके रैली की ‘लक्ष्मण रेखा’ पार करते ही जेडीयू ने स्पष्ट कर दिया था कि अब इन दोनों नेताओं की राज्यसभा सदस्यता खत्म कराने के लिए जल्द ही जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव संजय झा का कहना है कि शरद यादव और अली अनवर ने पार्टी के निर्देश का उल्लंघन कर आरजेडी के साथ मंच साझा किया। यह संविधान के दसवें अनुच्छेद के तहत स्वत: दल त्याग का मामला है। पूर्व में ऐसे मामलों में सदस्यता खत्म होने के दृष्टांत हैं। आगे उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मसले पर आरजेडी से गठबंधन तोड़ने का निर्णय जेडीयू विधानमंडल दल की बैठक में और एनडीए में शामिल होने का फैसला पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में लिया गया था। यह कोई व्यक्तिगत निर्णय नहीं। शरद यादव जब पार्टी के निर्णय के खिलाफ हैं तो यह साफ है कि वह पार्टी में नहीं रहना चाहते। वह अकेले पार्टी नहीं हो सकते।

उधर शरद यादव ने अपनी राज्यसभा सदस्यता खत्म करने को लेकर जेडीयू की कोशिशों का विरोध किया है। और तो और, उन्होंने तो नीतीश कुमार के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहने को ही चुनौती दे दी है। उनका कहना है कि नीतीश ने खुद ही भाजपा के साथ सरकार बनाकर पार्टी के चुनाव घोषणापत्र और बुनियादी सिद्धांतों को त्यागकर स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है।

यह भी बता दें कि शरद यादव ने चुनाव आयोग के आदेश 1968 के पैरा 15 के तहत आयोग से कहा है कि पार्टी का बहुमत उनके साथ है इसलिए पार्टी का चुनाव चिह्न उन्हें दे दिया जाए। हालांकि वे अपने बहुमत को न तो दिखा पा रहे हैं, न ही समझा पा रहे हैं। बहरहाल, जेडीयू को लेकर इस ‘रस्साकसी’ का परिणाम भले ही नीतीश के पक्ष में तयप्राय है, पर ये है बड़ा दिलचस्प, इसमें कोई दो राय नहीं।

बोल बिहार के लिए डॉ. ए. दीप

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