मोदी कैबिनेट का तीसरा विस्तार : कुछ विचार

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Mukhtar Abbas Naqvi-Nirmala Sitharaman-Piyush Goyal-Dharmendra Pradhan
Mukhtar Abbas Naqvi-Nirmala Sitharaman-Piyush Goyal-Dharmendra Pradhan

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कैबिनेट का तीसरा विस्तार किया। इस विस्तार में कुल 13 मंत्रियों ने शपथ ली, जिनमें 9 नए हैं, जबकि 4 मंत्रियों को कैबिनेट मंत्री के रूप में प्रमोशन दिया गया। इस विस्तार में बिहार को आरके सिंह (ऊर्जा और नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री) और अश्विनी कुमार चौबे (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री) के रूप में दो नए मंत्री मिले। लेकिन देखा जाय तो इस विस्तार में बिहार की किरकिरी भी कम नहीं हुई। पहली किरकिरी तो यह कि बिहार के सारण से सांसद राजीव प्रताप रूढ़ी इकलौते ऐसे मंत्री रहे जिनके लिए कहा जा रहा है कि उनका प्रदर्शन संतोषजनक न होने के कारण उन्हें कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया गया। वैसे तर्क उन्हें संगठन में लाए जाने का दिया जा रहा है। और दूसरी किरकिरी यह कि मीडिया में तमाम चर्चा के बावजूद जेडीयू को इस विस्तार में शामिल नहीं किया गया।

बहरहाल, अब उन चार मंत्रियों पर एक नजर जिन्हें प्रमोशन मिला। ये चार मंत्री हैं – निर्मला सीतारमण, धर्मेन्द्र प्रधान, पीयूष गोयल और मुख्तार अब्बास नकवी। सबसे अहम बात यह कि निर्मला सीतारमण को रक्षा मंत्रालय का भार सौंपा गया। मोदी ने एक बार फिर साबित किया कि जो उनके भरोसे पर खरा उतर रहा हो, उसको लेकर वो चौंकाने वाला फैसला कर सकते हैं। जेएनयू की छात्रा रहीं सीतारमण ने वाणिज्य  मंत्री के तौर पर उन्हें प्रभावित किया और परिणाम सामने है। गौरतलब है कि महिलाओं में निर्मला से पहले केवल इंदिरा गांधी ने रक्षा मंत्रालय संभाला है और वो भी तब, जब वो प्रधानमंत्री थीं। निर्मला के बाद मोदी ने पीयूष गोयल और धर्मेन्द्र प्रधान पर भरोसा जताया है। गोयल को रेल मंत्रालय सौंपा गया, जबकि कोयला मंत्रालय उनके पास पूर्ववत रहेगा ही। वहीं प्रधान को कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय का जिम्मा दिया गया है और इसके साथ पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय भी उन्हीं के पास रहेगा। बचे नकवी, अब वो अल्पसंख्यक मामलों के कैबिनेट मंत्री होंगे।

इस विस्तार की एक खास बात यह भी रही कि प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल में जिन नौ नए मंत्रियों को शामिल किया है, उनमें चार पूर्व नौकरशाह हैं। ये हैं – पूर्व गृह सचिव आरके सिंह, पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर सतपाल सिंह, सेवानिवृत्त डिप्लोमैट हरदीप सिंह पुरी और सेवानिवृत्त आईएएस केजे अल्फोंस। इनमें से पुरी और अल्फोंस तो सांसद भी नहीं हैं। यहां तक कि अल्फोंस का रुझान वामपंथी राजनीति की तरफ रहा है। दूसरी ओर आरके सिंह इस बार के बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा पर अपराधियों से पैसे लेकर उन्हें टिकट बेचने का आरोप लगा चुके हैं। तो क्या मान लिया जाय कि भाजपा के पास योग्य और अनुभवी सांसदों की इतनी कमी है कि वो एक ओर ‘अतीत’ से समझौता कर रही है, तो दूसरी ओर ‘आयातित’ लोगों पर भरोसा जता रही है? वैसे ‘आयातित’ लोगों की बात चली ही तो बता दें कि रेल मंत्री के रूप में इस्तीफे की पेशकश करने वाले सुरेश प्रभु अब वाणिज्य मंत्रालय देखेंगे।

‘बोल बिहार’ के लिए डॉ. ए. दीप

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