महाबलेश्वर सैल को सरस्वती सम्मान

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Mahabaleshwar Sail gets Saraswati Samman
Mahabaleshwar Sail gets Saraswati Samman

कोंकणी व मराठी भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार महाबलेश्वर सैल को वर्ष 2016 के सरस्वती सम्मान से नवाजा गया। केके बिड़ला फाउंडेशन द्वारा दिया जाने वाला सरस्वती सम्मान भारत में साहित्य के शीर्षस्थ पुरस्कारों में एक है। केन्द्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय सभागार में आयोजित समारोह में सैल को यह पुरस्कार प्रदान किया। इस मौके पर केके बिड़ला फाउंडेशन की अध्यक्ष शोभना भरतिया और देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश और पुरस्कार चयन समिति के चेयरमैन जस्टिस आदर्श सेन उपस्थित रहे। प्रशस्ति पत्र का पाठ पुरस्कार चयन परिषद के सदस्य सचिव सुरेश ऋतुपर्ण ने किया।

पुरस्कार ग्रहण करते हुए महाबलेश्वर सैल ने कहा कि साहित्य के माध्यम से देश की एकता दृढ़ होती है। सभी भारतीय भाषाओं का उद्गम एक है। इस तरह से हम सभी देशवासी भाषाबंधु हैं। सभी भारतवासी संस्कृतिबंधु और देशबंधु हैं। आज भारतीय साहित्य में कई भाषाओं का उत्सव चल रहा है। कोंकणी साहित्य की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कोंकणी भाषा की मूल भूमि गोवा है। यहां लम्बे पुर्तगाली शासन के दौरान इसका खास विकास नहीं हुआ। लेकिन गोवामुक्ति के 50-55 सालों में ही कोंकणी भाषा में उत्कृष्ट साहित्य की प्रचुर रचना की गई। आगे उन्होंने कहा कि सामान्य लोगों का जीवन भी जब किसी संवेदनशील लेखक की कलम से गुजरता है तो वह असाधारण हो जाता है। कहने की जरूरत नहीं कि उनकी यह बात उनकी औपन्यासिक कृति ‘होथन’ पर शतप्रतिशत लागू होती है, जो गोवा के पारंपरिक कुम्हार समुदाय के सांस्कृतिक जीवन पर केन्द्रित है। गौरतलब है कि इसी उपन्यास के लिए उन्हें सरस्वती सम्मान दिया गया है।

74 वर्षीय महाबलेश्वर सैल का जन्म 4 अगस्त 1943 को कर्नाटक के कारवार के निकट माजाली गांव में हुआ था। कोंकणी और मराठी साहित्य में उनका नाम बड़े आदर से लिया जाता है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि साहित्य के इस सेनानी ने भारतीय सेना में भी काम किया है। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान वे पंजाब की हुसैनवाला सीमा में तैनात थे। उनके चार मराठी नाटक और एक उपन्यास व कोंकणी में पांच लघु कथा संकलन व सात उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। लघुकथा संकलन ‘तारांग’ के लिए उन्हें 1993 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

बोल बिहार के लिए डॉ. ए. दीप

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