रैली ने बताया अब भी ‘प्रासंगिक’ हैं लालू

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Sharad-Rabri-Lalu in in 'BJP Bhagao Desh Bachao' Rally
Sharad-Rabri-Lalu in in 'BJP Bhagao Desh Bachao' Rally

पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान आज एक और बड़ी रैली का गवाह बना। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के आह्वान पर ‘भाजपा भगाओ देश बचाओ’ रैली में लगभग डेढ़ दर्जन विपक्षी दलों के नेता और राज्य के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। हालांकि रैली में जुटी भीड़ को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। आरजेडी के अनुसार रैली में 25 लाख से ज्यादा लोग थे तो बकौल सुशील कुमार मोदी लालू द्वारा ही आयोजित गरीब रैला का दशांस भी आज की रैली में नहीं था। पर आज की रैली गांधी मैदान पर आयोजित अब तक की रैलियों से चाहे जितनी बड़ी या छोटी हो, यह एक सफल रैली थी और इस रैली से लालू और उनके परिवार व पार्टी का उत्साह बढ़ा होगा, इसमें कोई दो राय नहीं।

आरजेडी और उसके बहाने विपक्षी एकता के लिए आज की रैली प्रतिष्ठा का प्रश्न थी। लालू की साख दांव पर लगी थी और तेजस्वी, जिनमें पार्टी अपना भविष्य देख रही है, की पैठ जनमानस में कितनी बनी है, उसकी आजमाइश भी होनी थी। कहना गलत न होगा कि रैली ने इन तमाम प्रश्नों के कमोबेश सकारात्मक उत्तर दिए। रैली में कई राज्यों के नेता एक मंच पर साथ दिखे। लालू, राबड़ी, तेजस्वी, तेजप्रताप और मीसा समेत आरजेडी के तमाम बड़े चेहरों के अलावा रैली में जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष और अभी ‘असली जेडीयू’ के अपने साथ होने का दावा कर रहे शरद यादव, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद व सीपी जोशी, झारखंड के दो पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी (जेवीएम) व हेमंत सोरेन (जेएमएम), सीपीआई के डी राजा, रालोद के जयंत चौधरी और एनसीपी के तारिक अनवर के अलावे डीएमके, जेडीएस, केरल कांग्रेस और एआईयूडीएफ के नेता मुख्य रूप से मौजूद थे। वहीं सोनिया, राहुल और मायावती की गैरमौजूदगी ने बताया कि विपक्ष की आगे की राह बहुत आसान नहीं है।

बहरहाल, रैली में शामिल तमाम नेताओं के निशाने पर स्वाभाविक रूप से भाजपा और नीतीश कुमार रहे। आरजेडी सुप्रीमो लालू ने कहा नीतीश को तेजस्वी से जलन थी क्योंकि उन्हें तेजस्वी से खतरा था। मेरी संपत्ति सार्वजनिक है। वापसी की हुंकार भरते हुए उन्होंने कहा कि ये नीतीश कुमार की अंतिम पलटी है। संघमुक्त भारत का नारा देते थे, बीमारी का बहाना बनाकर हमसे दूरी बनाई और संघ की गोद में जा बैठे। वहीं, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी ने कहा, नीतीश हमारे चाचा थे, हैं और रहेंगे पर अब वो अच्छे चाचा नहीं रहे। उन्होंने कहा, तेजस्वी तो बहाना था, उन्हें सृजन घोटाला छुपाना था।

अपनी राज्यसभा सदस्यता को दांव पर लगाकर रैली में पहुंचे शरद यादव ने कहा कि बिहार के लोगों ने महागठबंधन को जनादेश दिया था। उन्होंने कहा, मुझे सत्ता का मोह नहीं है और अब यह महागठबंधन देश स्तर पर बनेगा। वहीं, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा, बिहार की ऐतिहासिक धरती अगर रथ रोक सकती है, तो भाजपा को भी रोक सकती है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, काम मन से होता है, भाषणों से नहीं। अच्छे दिन के नाम पर देश में दलितों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है।

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद नीतीश कुमार पर विशेष रूप से हमलावर दिखे। उन्होंने उन पर बिहार की 11 करोड़ जनता को धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि ये तो वैसी ही बात हुई कि शादी किसी और से हुई और भाग किसी और के साथ गए। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने देश से भाजपा और बिहार से नीतीश कुमार को भगाने की बात की। उन्होंने सृजन घोटाले को चारा घोटाला जैसा बताया और कहा नीतीश-मोदी खजाना चोर, गद्दी छोड़। उधर उनके बड़े बेटे तेजप्रताप ने अपने पिता के अंदाज में लोगों को संबोधित करते हुए बकायदा शंख फूंककर ‘युद्ध’ का ऐलान किया।

जो भी हो, रैली ने फिलहाल लालू को खुश होने की वजह दी है। इस रैली ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि आरजेडी की अगली पंक्ति लालू और उनके परिवार के लिए सुरक्षित है और सिद्दिकी समेत तमाम नेताओं को पीछे की पंक्ति में बैठना सीख जाना चाहिए। बात जहां तक नीतीश कुमार की है, उनके खिलाफ कही गई बातें लालू समर्थकों को अभी जितना लुभा रही हैं, उनके विरोधियों को उसी अनुपात में एकजुट भी कर रही हैं। राजनीति की रग-रग से वाकिफ नीतीश इस ‘सत्य’ और ‘तथ्य’ से भलीभांति वाकिफ होंगे।

बोल डेस्क

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