क्या भाजपा मुस्लिम महिलाओं के प्रति बहुत संवेदनशील है?

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Muslim Women in India
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मैं तीन तलाक का विरोधी था और हूं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। पर यह क्या बात है कि तीन तलाक के समाप्त हो जाने का आधा ‘क्रेडिट’ वर्तमान सरकार को दिया जा रहा है। और ‘वे’ कह रहे हैं कि यह मुस्लिम महिलाओं के हित में उठाया गया कदम है। क्या भाजपा मुस्लिम महिलाओं के प्रति बहुत संवेदनशील है? क्या भाजपा के पास मुस्लिम महिलाओं के विकास और उत्थान की कोई बड़ी योजना है? तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट द्वारा असांविधानिक मान लिए जाने के बाद भाजपा में जो उल्लास है, उसका कारण कुछ और भी हो सकता है। कट्टरपंथी मुस्लिम समुदाय के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ एक ऐसे दुर्ग के समान था, जिसे वे अजेय मानते थे। तीन तलाक उस अजेय दुर्ग का छोटा-सा फाटक था। 70 साल तक मुस्लिम मतों के कारण कांग्रेस तथा अन्य दलों ने उसे छुआ तक नहीं था। अब भाजपा के शासन में उस अजेय दुर्ग (मुस्लिम पर्सनल लॉ) का एक फाटक टूट गया है, जो भाजपा की एक बहुत बड़ी विजय है। अब दुर्ग का क्या होगा? भाजपा की मुस्लिम पर्सनल लॉ संबंधी नीति किसी से छिपी हुई नहीं है। एक बार फिर भाजपा ने साफ संकेत दिया है कि उसकी राजनीति हिन्दू मतों के ध्रुवीकरण की है, जिसमें मुस्लिम मतों की कोई आवश्यकता नहीं है, फिर भी मुस्लिमों का अस्तित्व जरूरी है।

बोल डेस्क [असगर वजाहत की फेसबुक वॉल से साभार]

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