बदलेगी मोदी कैबिनेट की तस्वीर

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Narendra Modi
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जेडीयू के एनडीए में शामिल होने की घोषणा के बाद जल्द ही एआईएडीएमके भी एनडीए का हिस्सा होगी। माना जा रहा है कि पलानीसामी और पन्नीरसेल्वम के नेतृत्व वाले एआईएडीएमके के दोनों गुटों के विलय, जिसमें भाजपा ने बड़ी भूमिका निभाई है, के बाद पार्टी के एनडीए का अंग बनने की केवल औपचारिक घोषणा ही शेष है। राजनीति के जानकार बताते हैं कि इस बाबत एआईएडीएमके के ऐलान करते ही प्रधानमंत्री मोदी अपने दोनों नए साथियों – जेडीयू और एआईएडीएमके – को अविलंब सरकार में शामिल करेंगे। ऐसे में स्वाभाविक है कि सबकी निगाहें केन्द्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार पर हैं।

बता दें कि अब तक के फार्मूले के मुताबिक मोदी कैबिनेट के प्रस्तावित विस्तार में जेडीयू के दो और एआईएडीएमके के तीन मंत्री शामिल हो सकते हैं। इनके अलावे मोदी कुछ नए चेहरों को भी मौका दे सकते हैं। गौरतलब है कि मोदी की टीम में इस वक्त 71 मंत्री हैं और अब इसमें अधिकतम दस मंत्रियों को ही जगह दी जा सकती है। ऐसे में बहुत संभव है कि मौजूदा मंत्रियों की टीम में से कुछ को मिशन 2019 के मद्देनज़र संगठन में लाया जाय। अभी हाल में राजीव प्रताप रूढ़ी की अमित शाह से मुलाकात इस संबंध में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि रूढ़ी समेत भाजपा के बिहार कोटे के कुछ अन्य मंत्रियों को भी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी के साथ लाया जा सकता है। कहने की जरूरत नहीं कि कैबिनेट और संगठन में बदलाव को लेकर पार्टी के भीतर सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं।

कहा जा रहा है कि मुजफ्फरनगर और औरेया रेल हादसे के बाद इस्तीफे की पेशकश करने वाले सुरेश प्रभु को इस विस्तार में शहरी विकास या रक्षा मंत्रालय में से किसी एक की जिम्मेदारी मिल सकती है। वैंकेया नायडू के उपराष्ट्रपति बनने और मनोहर पर्रिकर के गोवा जाने के बाद इन दोनों मंत्रालयों में फुल टाइम मंत्री नहीं हैं। वहीं रेल मंत्रालय को लेकर चर्चा है कि इसकी जिम्मेदारी अभी इसी मंत्रालय के राज्य मंत्री का जिम्मा संभाल रहे मनोज सिन्हा या सड़क एवं परिवहन मंत्री के तौर पर अपनी छाप छोड़ने वाले नितिन गडकरी को दी जा सकती है।

जेडीयू कोटे से मंत्री बनने वालों की बात करें तो आरसीपी सिंह और संतोष कुशवाहा के मंत्री बनने की चर्चा राजनीति के गलियारों में है। वैसे वरिष्ठता और अनुभव को देखा जाय तो बिहार जेडीयू के अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह की दावेदारी को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता। बता दें कि संख्याबल के मुताबिक जेडीयू को एक कैबिनेट और एक राज्यमंत्री की जगह मिल सकती है।

हालांकि कैबिनेट विस्तार के लिए किसी तारीख का ऐलान नहीं हुआ है लेकिन माना जा रहा है कि अगस्त के अंतिम सप्ताह में नए शामिल होने वाले मंत्रियों का शपथ ग्रहण कार्यक्रम हो सकता है। चलते-चलते यह भी बता दें कि 2019 के चुनाव के पूर्व मोदी कैबिनेट का संभवत: यह अंतिम बदलाव होगा। लिहाजा मोदी किसी समीकरण को साधने में कोई कमी नहीं रखना चाहेंगे।

बोल डेस्क

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