इस बच्ची की आंखों में बाढ़ और बिहार देखिए

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A girl on Father's Shoulder in Bihar Flood
A girl on Father's Shoulder in Bihar Flood

आंखों में पानी और नसों में बिजली सी दौड़ जाने वाली ये तस्वीर बिहार के भयावह बाढ़ की है। एक छोटी-सी बच्ची अपने पिता के कंधों पर बैठी है और उसका पिता नाक तक बह रहे पानी की तेज लहरों से लड़ रहा है। बच्ची की आंखों में खौफ है और उम्मीद भी। अतीत और भविष्य के बीच खड़े वर्तमान के बस कुछ पल हैं इन दोनों के पास। इन्हीं चंद पलों में या तो ये अतीत हो गए होंगे या भविष्य की अगली लड़ाई की मोहलत मिल गई होगी बाप-बेटी को। क्या हुआ ये नहीं पता। इंटरनेट पर मौजूद बाढ़ की हजारों तस्वीर में से ये एक है, पर बाढ़ और बिहार की कहानी पूरी तरह बयां करती है। हमारा बिहार हर साल अतीत और भविष्य के बीच के वर्तमान कहलाने वाले हिस्से में ठीक इसी तरह आंखों में खौफ और उम्मीद लिए खड़ा होता है। हर साल बाढ़ आती है और बहुत कुछ लेकर चली जाती है। पर हम वहीं के वहीं रह जाते हैं। आखिर क्यों? आखिर कब तक? जब हर साल इन त्रासद पलों और रूह को कंपा देने वाली स्थितियों से हम गुजरते ही हैं, तो भला इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं ढूंढ़ पाते? अभी ‘राहत और बचाव’ कार्य में लगी राज्य और केन्द्र सरकार को एक साथ बैठकर इस पर शिद्दत से सोचना चाहिए।

बहरहाल, बाढ़ की ख़बर पर आते हैं। बिहार पर प्रकृति का कहर जारी है। राज्य में बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया है। सैकड़ों गांव जलमग्न हो चुके हैं। 16 जिलों में 1 करोड़ से ज्यादा लोग इसकी त्रासदी झेल रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 119 तो अन्य स्रोतों से 230 लोगों के मारे जाने की ख़बर है। गुरुवार को पूर्णिया, कटिहार और मधेपुरा के कई नए इलाकों में पानी आने से दहशत फैल गई। मधेपुरा में सर्वाधिक प्रभावित आलमनगर और चौसा प्रखंड के अलावा छह और प्रखंड इसकी चपेट में आ गए। जिले में भलुआही के पास एनएच 106 की सड़क लगभग 25 फीट कट जाने से यातायात ठप हो गया है।

बाढ़ का पानी मधेपुरा से आगे सहरसा जिले में भी फैल गया है। उधर कटिहार के नए इलाकों में सदर प्रखंड के भसना, मनसाही और कोढ़ा प्रखंड के कुछ हिस्सों में पानी जा चुका है। वहीं पूर्णिया जिले में बायसी अनुमंडल के बाद अब पानी बनमनखी और धमदाहा क्षेत्र में बढ़ रहा है। बनमनखी प्रखंड  की 10 पंचायतें बाढ़ की चपेट में आ गई हैं। गुरुवार से वहां एनएच 107 पर वाहनों का परिचालन भी बाधित हो गया है। अररिया की हालत तो और भी बदतर है। इस जिले में हताहत लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है और अब तक 20 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है।

इन जिलों के अतिरिक्त सुपौल, किशनगंज, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर भी बाढ़ से बेहाल हैं। मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में अब तक 94 लोगों की मौत हो चुकी है। वैसे गोपालगंज, वैशाली और छपरा में जहां नए इलाके बाढ़ के पानी से घिरे, वहीं कुछ प्रभावित जिलों में पानी के धीरे-धीरे उतरने की ख़बर भी है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने गुरुवार को गोपालगंज, बगहा, बेतिया, रक्सौल और मोतिहारी के बाढ़ग्रस्त इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और अधिकारियों को तमाम जरूरी निर्देश दिए। बता दें कि बाढ़ प्रभावित तमाम जिलों में एनडीआरएफ की 27 टीमों के 1110 जवान अपनी 114 नौकाओं, एसडीआरएफ की 16 टीमों के 446 जवान 92 नौकाओं और सेना के 630 जवान 70 नौकाओं के साथ राहत एवं बचाव कार्य में लगे हुए हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम के साथ चिकित्सकों का चलंत दस्ता भी प्रभावित इलाकों में लगा हुआ है। राहत शिविर बड़े पैमाने पर बनाए गए हैं और इनमें कुल 3.19 लाख लोगों को भोजन कराया जा रहा है। राहत शिविरों के अतिरिक्त 1112 जगहों पर बाढ़ पीड़ितों के लिए कम्यूनिटी किचेन भी शुरू किया गया है। हालांकि बाढ़ ने अपने पांव जिस कदर फैला लिए हैं, उसे देखते हुए इसे पर्याप्त नहीं कहा जा सकता।

चलते-चलते एक अच्छी ख़बर। अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में बाढ़ का तांडव कम होगा। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत के मुताबिक भारतीय मौसम विज्ञान विभाग से मिले पूर्वानुमान के अनुसार अगले सात दिनों तक उत्तर बिहार के जिलों में बारिश के आसार नहीं हैं। हां, कुछ जगहों पर छिटपुट बारिश जरूर हो सकती है। दक्षिण बिहार के जिलों के बारे में भी यही पूर्वानुमान है। ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि बाढ़ से जूझ रहे लोग थोड़ी चैन की सांस ले पाएंगे।

बोल बिहार के लिए डॉ. ए. दीप

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