साझी विरासत या साझी सियासत?

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Sanjhi Virasat Bachao Sammelan
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नीतीश कुमार से अलग होकर अपने राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई रह रहे शरद यादव की पहल पर दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में साझी विरासत सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें शामिल तो कई दलों के लोग हुए पर असल बेचैनी कांग्रेस की दिखी। इस सम्मेलन में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से लेकर राज्यसभा में कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद और अभी-अभी गुजरात में हुए राज्यसभा चुनाव की सुर्खियां बटोरने वाले अहमद पटेल तक सब पहुंचे। ऐसा लगा कि शरद यादव की इस मुहिम की जरूरत उनसे ज्यादा कांग्रेस को ही है।

साझी विरासत (वैसे ‘सियासत’ शायद अधिक उपयुक्त शब्द है) की इस मुहिम को देख पुराने तीसरे मोर्चे की याद ताजा हो रही थी। फर्क यह था कि तब के गैर-भाजपा और गैर-कांग्रेस दलों के साथ-साथ इस बार स्वयं कांग्रेस मंच के बीचोंबीच विद्यमान थी। कांग्रेस के अलावे मौजूदगी दर्ज करने वाले अन्य दलों की बड़ी हस्तियों में सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी, सीपीआई के डी राजा, नेशनल कांफ्रेंस के फारुख अब्दुल्ला और जेवीएम के बाबूलाल मरांडी शामिल हैं। बाबासाहेब अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। पर गौर करने की बात रही कि साझी विरासत बचाने के लिए लालू, अखिलेश, मायावती और ममता ने स्वयं पहुंचने की ‘जहमत’ नहीं उठाई। हां, आरजेडी ने सम्मेलन में अपने प्रवक्ता मनोज झा, सपा ने रामगोपाल यादव, बसपा ने राज्यसभा सांसद भाई वीर सिंह और टीएमसी ने शुभेंदु शेखर राय को भेजकर औपचारिकता जरूर पूरी कर दी।

बहरहाल, सम्मेलन में तमाम नेताओं ने एक-एक कर मोदी सरकार की नीतियों और काम करने के तरीके पर सवाल खड़े किए और उसे देश की गंगा-जमुनी तहजीब के लिए खतरा करार दिया। राहुल ने कहा, आरएसएस को जब तक सत्ता नहीं मिली तब तक तिरंगा नहीं फहराया। वे लोग कहते हैं ये देश हमारा है और तुम इस देश के नहीं हो। गुलाम नबी आजाद ने कहा, इंदिराजी ने कैबिनेट की बैठक कर राष्ट्रपति से मंजूरी लेकर आपातकाल लगाया था, पर मोदी के राज में बिना किसी अनुमति के हर रोज आपातकाल है। शरद यादव ने कहा, मौजूदा सरकार की नीतियों की वजह से संविधान खतरे में है। संविधान को बचाने के लिए समूचे विपक्ष को एकजुट होना पड़ेगा।

बिहार की राजनीति पर शरद यादव ने कहा कि सबको लगा मैं खिसक न जाऊं, मंत्री से संतरी न बन जाऊं, पर मैंने ऐसा नहीं किया। संविधान और लोकतंत्र के लिए मैं किसी प्रकार का समझौता नहीं कर सकता। जनता जब खड़ी हो जाती है, तो कोई हिटलर भी नहीं जीत सकता। वहीं, नीतीश बनाम शरद की लड़ाई में सीधे कूदते हुए कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने शरद गुट को असली जेडीयू करार दिया और नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जेडीयू को भाजपा का जेडीयू बताया।

बोल डेस्क

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