भारत में आर्थिक सुधारों का सफर

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Indira Gandhi-Manmohan Singh-Narendra Modi
Indira Gandhi-Manmohan Singh-Narendra Modi

अभी-अभी जीएसटी लागू हुआ। कर सुधार की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम है। लेकिन यहां तक पहुंचना संभव न होता अगर हम इससे पूर्व के तीन बड़े आर्थिक सुधारों से न गुजरे होते। हमारे आर्थिक सुधारों का सफर 1969 में नेशनलाइजेशन यानि बैंकों के राष्ट्रीयकरण से शुरू हुआ और लिबरलाइजेशन यानि आर्थिक उदारीकरण (1991) और डीमोनेटाइजेशन यानि विमुद्रीकरण (2016) से होते हुए वन टैक्स वन नेशन यानि जीएसटी (2017) तक पहुंचा। आईये, पिछले 48 सालों में हुए इन चारों बड़े आर्थिक सुधारों के उद्देश्य और असर पर एक नज़र डालें और जानने की कोशिश करें कि उन्होंने हमारी ज़िन्दगी को किस तरह बदला है।

नेशनलाइजेशन

उद्देश्य: 19 जुलाई 1969 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 14 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। इसका उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं में विस्तार के साथ गांवों और कस्बों में रह रहे लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ना था, ताकि लोन लेकर लोग व्यवसाय शुरू कर सकें और बेरोजगारी दूर हो। ग्रामीण इलाकों की स्थिति में सुधार, कृषि एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा तथा बीमार उद्योगों को फिर से खड़ा करना भी इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य था।

असर: पहले बैंकिंग चंद बड़े लोगों तक सीमित थी। बाद में समाज के हर तबके के लोग इसका हिस्सा बने। करीब 28 साल में 800 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई। बैंकों के शाखाओं की संख्या 7, 219 से बढ़कर 57 हजार हो गई। जमा और एडवांस में 11000 प्रतिशत और 9000 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

लिबरलाइजेशन

उद्देश्य: 24 जुलाई 1991 को तत्कालीन नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने अर्थव्यवस्था को निजी क्षेत्र के लिए पूरी तरह खोलने का फैसला किया। इसका मकसद आर्थिक गति को रफ्तार और रोजगार को बढ़ावा देना था। साथ ही भारतीय बाजार को पूरी दुनिया के लिए खोलना था। बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करना भी इसी का हिस्सा था। साथ ही कर सुधार के साथ विदेशी निवेश को लेकर लचीला सिस्टम तैयार करना था।

असर: तब जीडीपी की सालाना वृद्धि दर 2-3 प्रतिशत थी, जो 2005-06 से 2007-08 के बीच 9 प्रतिशत पर पहुंच गई। भारत आर्थिक महाशक्ति बनने लगा। 1991 के समय विदेशी मुद्रा भंडार खाली था। पर बाद में यह बढ़ा। 2008 की वैश्विक मंदी को भी इसने बेअसर किया।

डीमोनेटाइजेशन

उद्देश्य: 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 500 और 1000 के नोटों को बंद कर दिया। इसका मकसद डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देकर नकदरहित अर्थव्यवस्था खड़ी करना था। साथ ही बाजार से फेक करेंसी को बाहर करना, कालाधन वापस लाना और भ्रष्टाचार व टेरर फंडिग पर रोक लगाना भी इसका उद्देश्य था।

असर: सरकार का दावा है कि इससे टेरर फंडिंग कम हुई। आतंकी हमलों में कमी आई। नकली नोटों का चलन रुका। दूसरी ओर इसके निगेटिव असर से जीडीपी ग्रोथ कम हुई। हालांकि सरकार का कहना है कि इसके दूरगामी परिणाम अच्छे होंगे।

वन टैक्स वन नेशन

उद्देश्य: 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने के बाद सभी राज्यों में एक समान कर लगेगा। इससे राज्यों के बीच होने वाली अस्वस्थ प्रतियोगिता रुकेगी। जीएसटी का उद्देश्य माल और सेवाओं के प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन लागत पर करों के दोहरे प्रभाव को खत्म करना है। यही नहीं, टैक्स पर टैक्स के व्यापक प्रभावों को खत्म कर उसे एक टैक्स में बदलने से बाजार में वस्तुओं और सेवाओं की प्रतिस्पर्द्धा में काफी सुधार होगा, जिससे जीडीपी में वृद्धि होगी।

असर: परेशानी कम होगी और कारोबारी टैक्स देने के लिए प्रोत्साहित होंगे। सामान पर दर समान होगी तो महंगाई और कालाबाजारी पर रोक लगेगी। टैक्स ढांचा मजबूत होगा। मल्टीपल टैक्स फाइलिंग खत्म होगी और टैक्स अदा करने के लिए कई जगह दस्तावेज नहीं भरने होंगे।

बोल डेस्क

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