मीरा के आने का मतलब चुनाव में ‘जान’ अभी बाकी है

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Meira Kumar
Meira Kumar

राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए द्वारा रामनाथ कोविंद को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद अब विपक्ष ने भी अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है। पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार विपक्ष की साझा उम्मीदवार होंगी। गुरुवार को 17 विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक के बाद उनके नाम का ऐलान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने किया। उनके नाम का प्रस्ताव एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने रखा था।

मीरा कुमार के नाम की घोषणा के बाद एकतरफा दिख रहा राष्ट्रपति चुनाव अब दिलचस्प हो गया है। संख्याबल का हिसाब अंतत: चाहे जो हो, विपक्ष का दलित चेहरा न केवल एनडीए के दलित चेहरे से बड़ा है, बल्कि वो आधी आबादी का प्रतिनिधित्व भी करता है, और ये बड़ी बात है। मीरा कुमार पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम की बेटी हैं। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता होने के साथ-साथ वो पार्टी का बड़ा दलित चेहरा भी हैं। विपक्ष के उम्मीदवार के तौर पर मीरा कुमार के अलावे गोपाल कृष्ण गांधी, प्रकाश अंबेडकर और सुशील कुमार शिंदे के नाम भी चर्चा में थे, लेकिन दलित होने के साथ-साथ महिला होना उनके पक्ष में रहा। अनुभव और वरिष्ठता के लिहाज से भी उनकी उम्मीदवारी असंदिग्ध है।

विपक्ष द्वारा मीरा कुमार का नाम आगे करने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए ‘धर्मसंकट’ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। गौरतलब है कि ‘बिहार के राज्यपाल’ के तौर पर रामनाथ कोविंद के ‘अच्छे’ कार्यकाल की बात कह उन्होंने कल ही उन्हें समर्थन देने की घोषणा की थी। अब जबकि रामनाथ कोविंद के सामने ‘बिहार की बेटी’ मीरा कुमार हैं, तब नीतीश और उनकी पार्टी का अपने निर्णय को लेकर क्या तर्क होता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

इस बीच आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने नीतीश के फैसले को ‘ऐतिहासिक भूल’ करार देते हुए उनसे मीरा को समर्थन देने की अपील की है। उन्होंने यहां तक कहा कि समर्थन का फैसला सज्जनता या दुर्जनता पर नहीं, बल्कि विचारधारा के हिसाब से किया जाना चाहिए। उधर जवाब मे जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा है कि कोविंद को समर्थन का फैसला काफी सोच-समझकर लिया गया है और राजनीतिक फैसले इतनी जल्दी बदले नहीं जाते।

उधर बसपा प्रमुख मायावती ने मीरा कुमार को समर्थन दे दिया है, जिन्होंने कोविंद के नाम के ऐलान के बाद कहा था कि वे कोविंद का समर्थन कर सकती हैं, बशर्ते कि विपक्ष की तरफ से कोई बड़ा दलित उम्मीदवार मैदान में न हो। कहने की जरूरत नहीं कि मीरा उनकी शर्त पर पूरी तरह खड़ी उतरती हैं। उन्हीं की क्यों, वे तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की की शर्त भी पूरा करती हैं, जिन्होंने महिला उम्मीदवार होने की स्थिति में समर्थन की बात कही थी।

चलते-चलते इतना तो कहा ही जा सकता है कि जेडीयू समेत टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस, बीजू जनता दल और एआईएडीएमके जैसे कई गैर-एनडीए दलों के कोविंद को समर्थन का ऐलान कर देने के बाद भी मीरा को सामने लाकर विपक्ष ने मोदी-शाह की जोड़ी से परिणाम आने तक ‘निश्चिन्त’ होने का मौका छीन लिया है, इसमें कोई दो राय नहीं।

बोल बिहार के लिए डॉ. ए. दीप

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