मंदसौर: सुलगते सवालों के बीच राहुल

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Rahul Gandhi in Mandsaur
Rahul Gandhi in Mandsaur

पहले अपनी मांगों को लेकर आवाज़ उठा रहे असहाय किसानों पर गोलीबारी, फिर उन किसानों से मिलने जा रहे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह, पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ, एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, जेडीयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव समेत अन्य नेताओं को रोका जाना और फिर राहुल गांधी की गिरफ्तारी – क्या ये स्वस्थ लोकतंत्र की तस्वीर है? नहीं न? लेकिन हैरानी की बात यह कि मध्य प्रदेश में ये सब कुछ हो रहा है। हैरत तब और बढ़ जाती है जब ‘सबका साथ सबका विकास’ की बात याद आती है। ये वो नारा है जो भाजपा ने दिया और जिस नारे पर देश ने यकीन किया। सवाल उठता है, क्या इसी दिन के लिए? राजनीतिक तौर पर भी देखें, तो केन्द्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार है और इस नाते किसी ‘अवरोध’ का भी प्रश्न नहीं उठता, फिर भी किसानों का इस तरह ‘मुद्दा’ बन जाना समझ से परे है।

बहरहाल, मध्य प्रदेश के मंदसौर में किसानों से मिलने जा रहे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को गुरुवार दोपहर पुलिस ने हिरासत में ले लिया। राहुल के साथ ही दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, शरद पवार और शरद यादव भी थे, लेकिन इन सभी को मध्य प्रदेश बॉर्डर पर ही रोक लिया गया। इस तरह रोके जाने पर राहुल पुलिस और प्रशासन को चकमा देते हुए बाइक से मंदसौर जाने के लिए निकल पड़े, लेकिन उन्हें नीमच में रोक दिया गया। उस वक्त राहुल के साथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव और काग्रेस के युवा नेता सचिन पायलट भी थे। वहां से राहुल को खोर स्थित विक्रम सीमेंट के गेस्ट हाउस ले जाया गया, जिसे पुलिस ने तात्कालिक जेल बनाया था। हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई और पुलिस ने उन्हें इस शर्त पर पीड़ित परिवारों से मिलने की इजाजत दी कि वो राजस्थान की सीमा में उनसे मिलेंगे।

रिहाई के बाद राहुल गांधी राजस्‍थान की सीमा में पीड़ि‍त परिवारों से मिले। इसके बाद उन्‍होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि “यहां लोगों पर गोली चलाई गई, लेकिन सरकार ने कहा कि गोली नहीं चलाई गई… सरकार झूठ बोल रही है। यहां मैं पीड़ि‍त से मिलने आया हूं तो इसमें क्‍या गलत है? उन्‍होंने आगे कहा कि यूपी, मध्‍यप्रदेश, राजस्‍थान, तमिलनाडु और अन्‍य कई जगहों पर किसान परेशान हैं। भाजपा की सरकार के पास लाखों करोड़ रुपया पड़ा है, लेकिन वो उसे किसानों को न देकर सिर्फ ’50 लोगों’ को देना चाहती है।” इससे पूर्व हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी ने कहा था “मोदीजी किसान को सिर्फ गोली दे सकते हैं। उन्हें देश के सबसे बड़े आदमी का कर्ज माफ किया है, लेकिन किसानों का कर्ज माफ नहीं कर सकते।” राहुल ने मारे गए किसानों को शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग भी की।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के किसान कर्जमाफी, न्यूनतम समर्थन मूल्य, जमीन के बदले मुआवजे और दूध के मूल्य को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। मंगलवार को मंदसौर में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों पर पुलिस ने फायरिंग की थी, जिसमें पांच किसानों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद वहां किसानों का आंदोलन उग्र हो गया और प्रदर्शनकारियों ने सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया। गरीबों और किसानों के मुद्दे को लेकर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश में लगे विपक्ष को इस घटना के बाद एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। उधर इन सारे घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री मोदी की ओर से एक ट्वीट के अलावे वैसी कोई क्रिया-प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली, जो उनसे पूरे देश को अपेक्षित है। वैसे किसान आंदोलन से निपटने में प्रशासन की ओर से रही खामी के मद्देनज़र मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंदसौर समेत तीन जिलों के जिलाधिकारियों का तबादला जरूर कर दिया है।

बोल बिहार के लिए डॉ. ए. दीप

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