‘इंडिया’ को बचाने की कवायद

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Nitish Kumar-MK Stalin-Rahul Gandhi
Nitish Kumar-MK Stalin-Rahul Gandhi

डीएमके अध्यक्ष एम करुणानिधि के 94वें जन्मदिन पर गैरभाजपा दलों के एक संभावित मोर्चे की झलक देखने को मिली। इस दिन चेन्नई में नरेन्द्र मोदी व भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ एकजुट हुए विपक्ष के नेताओं ने खुलकर अपनी-अपनी बात रखी। काग्रेस के राहुल गांधी, सीपीएम के सीताराम येचुरी, नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्ला, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन, एनसीपी के माजिद मेनन और सीपीआई के डी राजा इस बात पर सहमत दिखे कि द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम ने उन्हें ‘इंडिया के आइडिया यानि विचार को बचाने’ का एक मौका दिया है। डीएमके के इस बड़े आयोजन में जेडीयू प्रमुख और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद थे। हालांकि वे भाजपा-विरोधी गठबंधन के समर्थन में राहुल, येचुरी या अब्दुल्ला की तरह आक्रामक तेवर में नहीं दिखे। आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव इस बड़े मौके पर शामिल नहीं हुए। हालांकि नीतीश ने उनकी ओर से सफाई दी और कहा कि इस मौके पर उनके उपस्थित न हो पाने को गलत न समझा जाए। वे तेज बुखार के कारण यहां नहीं आ पाए।

इस मौके पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि “वो (भाजपा) मानते हैं कि भारत में सिर्फ एक ही संस्कृति है। हम उनसे पूरी तरह असहमत हैं। सिर्फ कोई एक आवाज़ देश नहीं चला सकती और देश की संस्कृति क्या होगी ये तय नहीं कर सकती। इस मंच पर बैठे हम सभी लोग और देश के लोग आरएसएस और मोदीजी को देश में एक संस्कृति लागू नहीं करने देंगे।” उन्होंने जोर देकर कहा कि इंडिया का आइडिया ही ये है कि जब विविध आवाज़ें बोलती हैं तो भारत और मज़बूत होता है।

सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि “संविधान के चार स्तंभों – धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र, सामाजिक न्याय, आर्थिक आत्मनिर्भरता और संघीय ढांचे – में सभी का विश्वास है। इन मूलभूत सिद्धांतों को कभी चुनौती नहीं दी गई थी, लेकिन आज इन्हें चुनौती मिल रही है।”

उमर अब्दुल्ला ने कहा, “हम सही मायनों में उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम पूरे देश के बड़े तबके का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस तबके का राजनीतिक विचार ये है कि देश जिस दिशा में जा रहा है वो खतरनाक है। हम एक साथ आएंगे और हमारे संविधान के उस ढांचे को बनाए रखेंगे जिसका सपना हमारे देश की नींव रखने वालों ने देखा था।”

डीएमके के कार्यवाहक प्रमुख एम के स्टालिन का आरोप था कि केन्द्र सरकार भारत को एक धर्मशासित देश बनाने के लिए हर कदम उठा रही है। उन्होंने भी इसके खिलाफ विपक्ष के एकजुट होने और समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ काम करने की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

चलते-चलते बता दें कि खराब स्वास्थ्य के कारण करुणानिधि स्वयें रैली में मौजूद नहीं थे। लेकिन मंच पर मौजूद सभी नेताओं ने एक स्वर से कहा कि उनकी समझ और विशाल अनुभव भारत की भिन्न संस्कृतियों को बचाने में काम आएंगे।

बोल डेस्क

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