आओ, ‘गांधी सेतु बचाओ’

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'Gandhi Setu Bachao' Press Conference in Hajipur
'Gandhi Setu Bachao' Press Conference in Hajipur

उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला गांधी सेतु अपने निर्माण के महज 35 वर्षों बाद दम तोड़ने की कगार पर है। बिहार की जर्जर हो चुकी इस ‘जीवन-रेखा’ को नया जीवन देने के लिए एक अभियान शुरू किया गया है, जिसका नाम है ‘गांधी सेतु बचाओ’, जिसके संयोजक हैं पटना स्थित पालिका विनायक हॉस्पिटल तथा हाजीपुर स्थित सुजीवन हेल्थ केयर के निदेशक डॉ. बी. झा मृणाल। इस अभियान के माध्यम से डॉ. मृणाल ऐसे कई प्रश्नों को आवाज़ दे रहे हैं, जो वर्षों से लाखों लोगों के मन में उठ रहे होंगे लेकिन जिन्हें अभिव्यक्ति नहीं मिल पा रही थी। ध्यातव्य है कि डॉ. मृणाल इससे पूर्व भी गांधी सेतु को लेकर अत्यंत सजग रहे हैं। गांधी सेतु पर पुलिस कंट्रोस रूम हो, प्राथमिक उपचार केन्द्र हो या एंबुलेंस की सुविधा, इसके मूल में उन्हीं का योगदान रहा है।

पृष्ठभूमि

  1. 1982 में बने गांधी सेतु में पहली बार 1998 में दरार देखने को मिली थी। तब से अब तक 19 साल बीत गए लेकिन पुल ठीक होने की जगह और जर्जर ही होता गया। इस बीच जो भी कोशिशें हुईं वो नाकाफी रहीं।
  2. 2013 में पिलर संख्या 44 का सुपर स्ट्रक्चर नीचे की ओर झुक जाने के बाद उसकी मरम्मत की प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन 2017 तक सिवाय उस पिलर से जुड़े हुए हिस्से के तोड़े जाने के कुछ नहीं हुआ। क्यों नहीं हुआ इसका जवाब जनता को नहीं मिला और उस क्षतिग्रस्त हिस्से के कारण हर दिन लाखों लोग गांधी सेतु पर महाजाम झेलने को अभिशप्त हैं।
  3. अभी जबकि जनता सिर्फ एक क्षतिग्रस्त पिलर (पटना से जाते हुए पिलर संख्या 44) की मरम्मत के लिए ही वर्षों से प्रतीक्षारत है और सिर्फ इस एक पिलर के टूटे होने से जाम पर काबू पाना कठिन है, ऐसे में पुल को ठीक करने के नाम पर हाजीपुर से आते हुए बाकी पिलरों को तोड़ने की तैयारी, और वो भी 12-12 की संख्या में, भयावह समस्या को निमंत्रण देना है और आवागमन हेतु इस पुल पर निर्भर करोड़ों बिहारवासियों के लिए अत्यंत चिन्ता का विषय है।

जनहित याचिका

गांधी सेतु की समस्या के समाधान के लिए ‘गांधी सेतु बचाओ’ अभियान के संयोजक डॉ. मृणाल ने पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। उनकी ओर से याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता सुमन कुमार बताते हैं कि ग्रीष्म अवकाश के बाद इस याचिका पर सुनवाई होगी। उन्होंने आशा जताई कि माननीय हाईकोर्ट का फैसला बिहार की करोड़ों जनता के हित में होगा।

क्या है मांग

शनिवार को हाजीपुर में आयोजित प्रेस-कांफ्रेंस में पत्रकारों से बात करते हुए अभियान के संयोजक डॉ. मृणाल, मीडिया पार्टनर डॉ. ए. दीप, सीईओ, मीडिया 21 और एडवोकेट सुमन कुमार ने बताया कि पहले चरण में ‘गांधी सेतु बचाओ’ अभियान की चार मांगें हैं:

  • पिलर संख्या 44 के पास गांधी सेतु के टूटे हुए हिस्से को ठीक करते हुए क्रमश: हाजीपुर की ओर बढ़ा जाय।
  • पिलर संख्या 1 से 12 को तोड़ने की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाय।
  • गांधी सेतु से बड़ी गाड़ियों का परिचालन अविलंब बंद हो।
  • और ट्रैफिक को सुगम करने की पर्याप्त व्यवस्था हो ताकि रोज लगने वाले भीषण जाम से मुक्ति मिले।

जबकि अभियान के दूसरे चरण में गांधी सेतु के समानान्तर एक और पुल बनाने की मांग रखी जाएगी।

आम जनता का सहयोग जरूरी

‘गांधी सेतु बचाओ’ अभियान के एक आंकड़े के मुताबिक गांधी सेतु से हर दिन 5 लाख यानि महीने में 1.5 करोड़ लोग जाम के शिकार होते हैं। बिहार की कोई दूसरी समस्या नहीं, जिससे हर महीने इतने लोग जूझते हों। ऐसे में करोडों बिहारवासियों का दायित्व बनता है कि इस गैरराजनीतिक अभियान को अपना नैतिक संबल दें। आम जनता के सहयोग से ही इसे जनांदोलन का रूप दिया जा सकता है।

बोल डेस्क

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