रीमा लागू: मुश्किल है इस ‘मां’ की भरपाई

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Reema Lagoo
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आधुनिक हिन्दी सिनेमा में ‘मां’ की भूमिका को नई पहचान देने वाली रीमा लागू नहीं रहीं। हंसती-मुस्कुराती खुशमिज़ाज मां के कई किरदारों को जीवंत कर देने वाली बॉलीवुड की इस लोकप्रिय अभिनेत्री का महज 59 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें सीने में दर्द की शिकायत के बाद मुंबई के कोकिला बेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में दाखिल कराया गया था। गुरुवार सुबह वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली।

रीमा लागू मराठी और हिंदी फिल्मों का जाना-पहचाना चेहरा थीं। टेलीविज़न की दुनिया में भी वो ख़ासी लोकप्रिय थीं। उन्होंने कई सीरियलों में काम किया। मराठी रंगमंच पर दशकों तक वो सक्रिय रहीं और बॉलीवुड की ममतामयी ग्लैमरस मदर के तौर पर जानी गईं। उन्होंने ‘मैंने प्यार किया’, ‘आशिक़ी’, ‘साजन’, ‘हम आपके हैं कौन’, ‘वास्तव’ और ‘हम साथ-साथ हैं’ जैसी यादगार फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया था।

ये रीमा ही थीं जिन्होंने ‘हम साथ-साथ हैं’ में कैकेयी से प्रेरित भूमिका में भी थी लोगों का दिल जीत लिया था। वहीं ‘वास्तव’ में उन्होंने ‘मदर इंडिया’ की नरगिस की यादें ताज़ा करा दी थीं। इसी तरह सलमान खान को स्थापित करने वाली फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ या हिन्दी सिनेमा में मील का पत्थर ‘हम आपके हैं कौन’, में रीमा ने अपनी भूमिका जिस सहजता और गरहाई से निभाई थी, उसकी कोई सानी नहीं।

रीमा लागू का फिल्मी करियर श्याम बेनेगल की फ़िल्म ‘कलयुग’ से शुरू हुआ था, पर आगे चलकर ‘मां’ की जिन भूमिकाओं पर उनकी छाप-सी पड़ गई थी, उसकी शुरुआत राजश्री की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ से हुई। इस फिल्म से पहले बॉलीवुड में मां के किरदार की अलग छवि थी। रीमा लागू ने उसे नए तरीके से परिभाषित किया। ‘मैंने प्यार किया’ के लिए उन्हें 1990 में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के लिए फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड का नोमिनेशन भी मिला। वैसे ‘आशिक़ी’, ‘हम आपके हैं कौन’ और ‘वास्तव’ के लिए भी उन्हें नोमिनेट किया गया था।

‘बोल बिहार’ के लिए रूपम भारती

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