बाहुबली-2: इसे कहते हैं सिनेमाई करिश्मा

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Bahubali-2
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एक था जादूगर। जो कुछ सोच लेता तो उसे अपनी सोच से भी कई गुना ज्यादा खूबसूरत बना देता। उसके करिश्मों के चर्चे दूर-दराज तक थे। और फिर एक दिन उसे एक नई चुनौती मिली। कुछ ऐसा रचने की जो पहले कभी न रचा गया हो। जादूगर ने यह चुनौती भी स्वीकार कर ली। उसने सबसे पहले अपना पुराना कैनवास फाड़ कर फेंका। ढेर सारे जादुई रंग जुटाए। बादलों से बुने अपनी कल्पना के रथ पर सवार हुआ और आसमान को ही कैनवास बना कर उस पर अपने करिश्माई रंगों की रंगोली सजा दी। शायद बताने की जरूरत नहीं है कि वह जादूगर एस.एस.राजामौली हैं।

‘बाहुबली-1’ की छप्पर फाड़ सफलता के बाद इसके दूसरे हिस्से से लगी लोगों की पहाड़ सी उम्मीदें पूरी करने के लिए शायद उन्होंने भुला दिया कि वह किसी टॉलीवुड या बॉलीवुड से ताल्लुक रखते हैं। बजट के साथ ही उन्होंने अपनी सोच और अपने प्रयासों को भी विस्तार दिया और दर्शकों के लिए लेकर आए ‘बाहुबली-2’ जैसी फिल्म जिसका ब्यौरा देने के लिए आज पुराने विशेषण कम पड़ते नजर आ रहे हैं।

इस फिल्म की सबसे बड़ी सफलता यही है कि इसे देखते हुए आप दिल्लीवाले, मेरठिये, मुंबईकर या हैदराबादी नहीं रहते। माहिष्मतिये हो जाते हैं। माहिष्मति सल्तनत के ‘लार्जर देन लाइफ’ हीरो बाहुबली की हर खुशी, हर जीत, हर पैंतरे पर आपका ताली बजाने का मन करता है तो उसकी हर बेबसी, हर हार और हर दर्द पर वही मन बैठ सा जाता है।

फिल्म देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि आखिर क्यों पूरा देश राजामौली की कल्पनाशीलता और उनके नजरिये का कायल है। साधारण से साधारण घटनाक्रम को भी वह इतने अद्भुत कैमरा एंगल और इतने हैरतअंगेज मूवमेंट्स के जरिये दिखाते हैं कि आप हतप्रभ रह जाते हैं। कुछ ऐसा ही है फिल्म का शुरुआती दृश्य जिसमें शिवगामी देवी मंदिर जा रही हैं और रास्ते में हाथी बेकाबू होकर तबाही पर उतर आता है। इसी पल होती है अमरेन्द्र बाहुबली (प्रभास) की एंट्री। हाथी को काबू करने और उसकी सूंड़ पर चढ़ते हुए उसकी सवारी करने वाले इस शुरुआती घटनाक्रम से ही आहट मिल जाती है कि इसके बाद का यह सिनेमाई सफर किस कदर हैरतअंगेज होने वाला है। कहानी या ‘कटप्पा सस्पेन्स’ पर कुछ बोलना ठीक नहीं रहेगा। कटप्पा सस्पेन्स से जुड़ा एक वीडियो लीक हुआ है जिसे हो सकता है आपने देख लिया हो और नहीं भी देखा तो हम इसका खुलासा नहीं करेंगे। हालांकि यह खुलासा उतना चौंकाने वाला नहीं है। हो सकता है आपने इसका सही जवाब तलाश भी लिया हो।

प्रभास ने फिल्म के पहले भाग के बाद एक बार फिर साबित कर दिया है कि उन पर इतना बड़ा दांव खेलने का राजमौली का निर्णय गलत नहीं था। इस किरदार को उन्होंने जिस सहजता से निभाया है, शायद ही कोई दूसरा निभा पाता। एक्टिंग, लुक, हाव-भाव- हर पहलू के साथ उन्होंने न्याय किया है। अनुष्का शेट्टी एक खूबसूरत वीरांगना देवसेना के रूप में जंची हैं। एक सजायाफ्ता बंदिनी के बाद उन्हें एक राजकुमारी के रूप में देखना एक खुशनुमा अनुभव है। शिवगामी देवी बनी राम्या कृष्णन का काम भी प्रभावित करता है। राजपरिवार की स्त्रियों के रूप में अनुष्का और राम्या दोनों ही बेहद सौम्य लगी हैं। फिल्म के विलेन यानी भल्लालदेव बने राणा दग्गुबाती और बिज्जलदेव बने एम नासिर का काम इसलिए सराहनीय है क्योंकि ये अपने लिए लोगों के मन में घृणा पैदा करने में सफल रहते हैं।

कटप्पा को हम कैसे भूल सकते हैं? लोगों ने जिस शिद्दत से बाहुबली को याद रखा है, उसी शिद्दत से कटप्पा को भी अपने जेहन में जिंदा रखा है। ‘बाहुबली-1’ में कटप्पा ने लोगों को चौंकाया था, इस बार भी वह कई बार चौंकाते हैं। कभी राजमाता शिवगामी देवी से ऊंची आवाज में बात करके तो कभी अपने भांजे अमरेंद्र बाहुबली के प्रेम की नैया को पार लगाते हुए।

फिल्म की कहानी से भी ज्यादा अच्छा है इसका स्क्रीनप्ले और डायलॉग। इन्हें लिखते वक्त सबसे बड़ी चुनौती रही होगी इसके जॉनर ‘ऐतिहासिक युद्ध ड्रामा’ का ध्यान रखते हुए इसके संवादों को बोझिल होने से बचाना। यह काम इसके स्क्रीनप्ले लेखक राजमौली और हिंदी डायलॉग लेखक मनोज मुन्तशिर ने बखूबी कर दिखाया है। इसके लिए उन्होंने कुछ कॉमिक परिस्थितियों और डायलॉग्स का सहारा लिया है जिनमें से ज्यादातर कटप्पा के हिस्से में आए हैं। इन कॉमिक दृश्यों और अपनी जबर्दस्त भाव-भंगिमाओं के चलते कटप्पा कई बार तालियां लूट ले जाते हैं। फिल्म के स्पेशल इफेक्ट्स इतने जबर्दस्त हैं कि फिल्म 2डी में भी 3डी का मजा देती है। ऊंचाई पर बने किले से जब कोई किरदार नीचे झांकता है, तो दर्शक को भी डर सा लगता है।

हॉलीवुड की देखादेखी छोटी होती जा रही बॉलीवुड फिल्मों के इस दौर में 2 घंटे 47 मिनट की बाहुबली 2 काफी लंबी महसूस होती है। इसे कुछ छोटा किया जा सकता था। फिल्म का संगीत औसत है। कुछ गीत लंबे हैं जो फिल्म की गति में रुकावट पैदा करते हैं। कैलाश खेर का गाया गीत ‘जय-जयकारा’ प्रभावी है। और समीक्षा का अंत एक खास सस्पेंस के साथ… फिल्म खत्म हो चुकी है। स्क्रीन पर चल रहे क्रेडिट्स के साथ एक छोटे बच्चे की आवाज आती है,‘तो क्या अब अगला राजा महेंद्र बाहुबली का बेटा बनेगा?’ अब सोचते रहिए जवाब…

बोल डेस्क [‘हिन्दुस्तान’ से साभार]

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