के. विश्वनाथ को दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड

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K. Vishwanath
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तेलुगु, तमिल और हिंदी फिल्मों के मशहूर निर्देशक और अभिनेता कासीनाधुनी विश्वनाथ को साल 2016 के दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड से नवाजा गया है। केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने सोमवार को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। नायडू ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘कलातपस्वी के. विश्वनाथ को 2016 का दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड मिलने पर शुभकामनाएं।’

बता दें कि के. विश्वनाथ को फिल्मों में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए इससे पहले पांच नेशनल फिल्म अवॉर्ड, 11 फिल्मफेयर अवॉर्ड और 20 नंदी अवॉर्ड (आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा प्रदत्त) मिल चुके हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें भारत सरकार की ओर से पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

विश्वनाथ के आगे केवल ‘कासीनाधुनी’ का प्रथम अक्षर ‘के’ लगाने वाले और इसी रूप में विख्यात भारतीय सिनेमा के इस महत्वपूर्ण हस्ताक्षर का जन्म 19 फरवरी 1930 को आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत चेन्नै के एक स्टूडियो में तकनीकी सहायक के रूप में की थी। आगे चलकर वे फिल्मों के निर्देशन में आए और एक से बढ़कर एक यादगार फिल्में दीं, जिनमें राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली ‘स्वाति मुथ्यम’ और ‘श्रीवेन्नेला’ जैसी यादगार फिल्में शामिल हैं।

सामाजिक विषयों पर फिल्म बनाने और साधारण कहानी से असाधारण बात कहने में के. विश्वनाथ की कोई सानी नहीं। तेलुगु और तमिल फिल्मों के अलावा उन्होंने हिंदी की भी कई चर्चित फिल्मों का निर्देशन किया। इन फिल्मों में 1979 की ‘सरगम’, 1982 की ‘कामचोर’, 1985 की ‘जाग उठा इंसान’ और 1989 की ‘ईश्वर’ जैसे नाम उल्लेखनीय हैं।

‘बोल बिहार’ के लिए रूपम भारती

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