सकारात्मकता से हारता है एड्स भी

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Power of Positive Thinking on AIDS
Power of Positive Thinking on AIDS

ब्रिटेन में हुए एक नए अध्ययन के मुताबिक एचआईवी के खुशमिजाज मरीजों से संक्रमण का खतरा कम हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने एचआईवी के कुछ मरीजों को खुश और सकारात्मक रहने की तकनीकें सिखाईं। फिर डेढ़ साल तक इन तकनीकों का अभ्यास कराया। इसके बाद मरीजों में इस बीमारी के घातक वायरसों की तादाद, खासकर रक्तप्रवाह में, कम पाई गई।

शोधकर्ताओं ने कहा कि इसका मतलब यह हुआ कि इन मरीजों में एड्स विकसित होने की आशंका काफी कम थी। इनसे संक्रमण फैलने की आशंका भी नगण्य थी। और इन मरीजों को अवसादरोधी दवाओं की जरूरत भी लगभग नहीं के बराबर रह गई थी।

शोधकर्ता जुडिथ मोस्कोवित्ज के अनुसार मरीजों में वायरस की तादाद में कमी इसलिए आई क्योंकि उनका प्रतिरक्षातंत्र अपेक्षाकृत अधिक मजबूत था। उन्होंने कहा, कई अध्ययनों में पाया गया कि जो एचआईवी संक्रमित लोग सकारात्मक भावनाएं रखते हैं उनके प्रतिरक्षा तंत्र को इस वायरस से कम नुकसान पहुंचता है।

वास्तविकता यह है कि सकारात्मक भावना से मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। हां, एचआईवी-पॉजीटिव मरीजों में यह अपनी तरह का पहला अध्ययन है, जिसने दिखाया है कि मरीजों की मानसिक स्थिति उनके शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।

बोल डेस्क

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