सबने कहा फिर दिशा दिखाए बिहार

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Champaran Satyagrah Shatabdi Samaroh
Champaran Satyagrah Shatabdi Samaroh

प्रकाशोत्सव, मानव-श्रृंखला और अब चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह का ऐतिहासिक आयोजन – लगता है फिर से जग गया है बिहार। और जगा भी है कुछ ऐसे कि एक बार फिर इसमें देश और दुनिया को जगाने की क्षमता देखी जाने लगी है। गौरतलब है कि सोमवार को पटना के नवनिर्मित ज्ञान भवन में महात्मा गांधी के विचारों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय विमर्श के साथ चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह का भव्य आगाज हुआ। इस खास मौके पर जुटे गांधीवादियों ने कहा कि देश संक्रमणकाल से गुजर रहा है, और जब-जब देश में ऐसा दौर आया है, बिहार ने दिशा दिखाई है। सबने आह्वान किया कि बिहार एक बार फिर आगे आए। सभी ने एक सुर से कहा कि बिहार पहला राज्य है, जिसने गांधी के चंपारण सत्याग्रह के 100 साल पूरे होने को इस व्यापक रूप में याद किया है। वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विचारकों से अपील की कि वे देश को चलाने का एजेंडा तय करें।

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश-दुनिया में टकराव और असहिष्णुता का माहौल है। एकतरफा संवाद चल रहा है। कुतर्क गढ़े जा रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि गांधीवादी देश को दिशा दें। नीतीश ने कहा कि दो दिवसीय विमर्श से जो नतीजे निकलेंगे, उस पर किताब प्रकाशित होगी। नतीजों को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद लोग ही तय करेंगे कि  उन्हें कौन-सा एजेंडा पसंद है। उन्होंने कहा कि आज भौतिकवाद लोगों के दिमाग पर हावी हो गया है। इससे छुटकारे का भी मार्ग विमर्श से प्रशस्त होगा। गांधीजी की लोग बहुत इज्जत करते हैं, पर उनके विचारों पर अमल नहीं करते। उनके विचारों को हम घर-घर तक पहुंचाएंगे।

इस मौके पर गांधीजी के प्रपौत्र और पूर्व राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी ने कहा कि देश में लोगों की आजादी छीनी जा रही है। एक ओर जुल्म-जबरदस्ती से जमीन अधिग्रहण किया जा रहा है, तो दूसरी ओर बच्चों को खाना देने के पहले मिड डे मिल में और सुप्रीम कार्ट की रोक के बावजूद मनरेगा में आधार कार्ड मांगा जा रहा है। अभी ऐसी कौन-सी इमरजेंसी आ गई जो तीन-तीन अध्यादेश लाकर जमीन अधिग्रहण कानून को पास कराया जा रहा है। ऐसा तो अंग्रेजी राज में भी नहीं हुआ। और जहां तक आधार का प्रश्न है, तो इसकी अनिवार्यता खतरनाक है। लोगों को सचेत होना चाहिए। गांधीजी के प्रपौत्र ने कहा कि साल 1917 और 1977 में देश में फैले अंधकार में बिहार ने प्रकाश दिखाया। आज फिर देश में अंधकार है, भय है, जिसमें बिहार ही रास्ता दिखा सकता है।

विमर्श के दौरान गोपालकृष्ण गांधी ने जहां जमीन-अधिग्रहण और आधार की अनिवार्यता पर प्रश्न उठाए, वहीं एनएपीएम की राष्ट्रीय समन्वयक मेधा पाटकर ने प्राकृतिक संसाधनों को लेकर अपनी चिन्ता जताई। उन्होंने कहा कि देश आज जिस चौराहे पर खड़ा है, ऐसे में विमर्श जरूरी है। आज देश में सहमति और विमर्श को भुलाया जा रहा है। प्राकृतिक संसाधन जबरदस्ती छीने जा रहे हैं। लोगों का हक छीना जा रहा है।

लगभग सारे वक्ताओं ने इस बात पर गहरी चिन्ता जताई कि आज आदर्श और व्यवहार में बहुत बड़ा फर्क आ चुका है। गांधी शांति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली के अध्यक्ष कुमार प्रशांत ने कहा कि आज देश में दो तरह की धारा चल रही है – एक नाम का गांधी और एक काम का गांधी। वहीं न्यायमूर्ति चंद्रशेखर ने इस बात पर दुख जताया कि आज कानून का पालन करने वालों से ज्यादा प्रतिष्ठा कानून तोड़ने वालों की है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले को दरकिनार करने के लिए सरकार भी चोर रास्ता निकाल रही है। ऐसे में हमें नए सिरे से सोचने की जरूरत है, तभी गांधी के सपनों का देश हम बना पाएंगे।

विमर्श के केन्द्र में जहां देश की वर्तमान स्थिति को लेकर वक्ताओं की चिन्ता और आज के संदर्भ में गांधी की प्रासंगिकता थी, वहीं बिहार के लिए एक उम्मीद भरी दृष्टि भी थी। न्यायमूर्ति राजेन्द्र सच्चर ने बड़े स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश को बिहार ने ही असली गांधी दिया। गांधी का चंपारण सत्याग्रह सिर्फ किसानों को तकलीफ से बाहर निकालने के लिए नहीं था, बल्कि यह आजादी की लड़ाई की शुरुआत थी। यहीं से आजादी की लड़ाई और व्यापक हुई और देश भर में फैली। आगे की लड़ाई भी हमें गांधी के रास्ते पर लड़नी चाहिए। 2019 को ध्यान में रख अभी से इसकी तैयारी होनी चाहिए।

इस मौके पर प्रसिद्ध गांधीवादी रजी अहमद, प्रेरणा देसाई, टी सुब्बाराव, सच्चिदानंद, बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव एवं शिक्षामंत्री अशोक चौधरी भी मौजूद थे। गौरतलब है कि बिहार सरकार ने चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह की बाबत पूरे साल भर के लिए कार्यक्रम तय किए हैं। राष्ट्रीय विमर्श से जिस समारोह का आगाज हुआ है, उसका समापन 20 अप्रैल 2018 को होना है।

बोल बिहार के लिए डॉ. ए. दीप

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