उत्तर भारत में पसरते गॉल ब्लाडर कैंसर के पांव

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Gall Bladder Cancer
Gall Bladder Cancer

गॉल ब्लाडर बहुत तेजी से अपने पांव पसार रहा है। आंकड़े बताते हैं कि कैंसर के कुल मामलों में 20  प्रतिशत मामले गॉल ब्लाडर कैंसर के होते हैं। खासकर उत्तर भारत में इसके रोगियों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। दुर्भाग्य की बात यह कि इनमें से 90  प्रतिशत लोगों को बीमारी का पता चौथे स्टेज पर चलता है। तब तक गॉल ब्लाडर के साथ शरीर के दूसरे अंग भी प्रभावित हो चुके होते हैं और यह लाइलाज हो चुका होता है।

गौरतलब है कि विश्व के किसी भी देश की अपेक्षा भारत में, विशेषकर उत्तर भारत में, इस रोग से ग्रसित लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है। एक अध्ययन के अनुसार गॉल ब्लाडर कैंसर के ज्यादा मामले देश के उत्तरी हिस्से और उसमें भी खासकर यूपी और बिहार में सामने आ रहे हैं। यह भी देखा जा रहा है कि गंगा किनारे के शहरों में इसकी संख्या ज्यादा है, हालांकि इसका कारण क्या है, इस बारे में अभी शोध पूरा नहीं हो पाया है। साथ ही यह भी कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में गॉल ब्लाडर कैंसर ज्यादा पाया जा रहा है।

वैश्विक परिदृश्य में देखें तो भारत के अलावा चिली में गॉल ब्लाडर कैंसर के कुछ मरीज पाए जाते हैं। बाकी देशों में इस बीमारी के मरीजों की संख्या न के बराबर होने से इस पर कोई देश रिसर्च नहीं कर रहा है। जहां तक भारत की बात है, यहां रिसर्च के लिए पर्याप्त फंड नहीं है। ऐसे में इस बीमारी पर रिसर्च नहीं हो पा रहा है। नतीजतन यह रोग और बढ़ता जा रहा है। स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब लोग समय पर इलाज के लिए नहीं पहुंच पाते।

बहरहाल, गॉल ब्लाडर कैंसर से बचना हो तो पथरी को कभी हल्के में न लें, क्योंकि इस कैंसर के 60 से 70  प्रतिशत मामलों में मरीज के गॉल ब्लाडर में पथरी पाई जाती है। पथरी होने के बाद डॉक्टर सर्जरी की सलाह देते हैं। इस दौरान यह ध्यान रखना चाहिए कि सर्जरी से पहले कैंसर की जांच हो गई हो। अगर कैंसर हुआ तो सर्जरी के दौरान और फैल सकता है। इसके बाद मरीज की आयु सिर्फ छह महीने रह जाती है।

गॉल ब्लाडर कैंसर से बचने के लिए इसके लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है। मरीज के लक्षणों पर ध्यान दें तो इस प्रकार के कैंसर का पता सर्जरी के पहले चल सकता है और मरीज की जान बचाई जा सकती है। पेट के दाईं ओर लगातार दर्द होना, गैस की शिकायत रहना, बदहजमी के साथ भारीपन होना, दवा लेने के बाद भी राहत न मिलना जैसे लक्षणों के नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे किसी भी लक्षण के होने पर तत्काल विशेषज्ञ के पास जाएं।

बोल डेस्क

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