ईवीएम पर उंगली

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क्या वास्तव में ईवीएम ऐसी बला है, जो मनचाहे नतीजे निकाल सकती है या यह राजनीतिक दलों की सिर्फ हार की कुंठा है? दरअसल, अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट दिया या नहीं, ईवीएम से स्पष्ट नहीं होता है, वीवीपीएटी यानि वोट का प्रिंट आउट निकालने जैसी तकनीकी लागू करने को कोर्ट ने कहा है, लेकिन यह सर्वसुलभ नहीं हो पाई है और इसमें भी कुछ तकनीकी पेचोखम पाए गए हैं। कुल मिलाकर, ईवीएम प्रक्रिया पर भरोसे की कमी के आरोप लगे हैं। मजे की बात यह है कि एक ओर भारत में इसका जोर-शोर से इस्तेमाल होने लगा है, उधर दुनिया के अधिकांश हिस्सों में ईवीएम का प्रयोग वर्जित है, जैसे जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जापान, सिंगापुर, नीदरलैंड, आयरलैंड, डेनमार्क और आंशिक रूप से अमेरिका में भी। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में कम्प्यूटर विज्ञान के प्रोफेसर एलेक्स हाल्डरमैन के मुताबिक, भारतीय मशीनों के हार्डवेयर को आसानी से बदला जा सकता है। मशीन के जिस प्रोग्राम में वोटिंग डाटा स्टोर रहता है, वे असुरक्षित हैं और उन्हें बाहरी सोर्स से मैनीपुलेट किया जा सकता है। कंट्रोल यूनिट के डिस्प्ले सेक्शन में कुख्यात ट्रोजन वायरस के साथ एक चिप लगा दी जाए, तो ईवीएम को हैक करना आसान हो जाता है। ये चिप मनमाफिक नतीजे उद्घाटित कर सकती है।

बोल डेस्क [‘डायचे वेले’ में शिवप्रसाद जोशी, सौ. ‘हिन्दुस्तान’]

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