बदलते समय में गुरमेहर कौर

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Gurmehar Kaur
Gurmehar Kaur

दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा गुरमेहर कौर ने सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीर पोस्ट करके कहा कि उसके पिता को ‘पाकिस्तान ने नहीं, युद्ध ने मारा’। कारगिल युद्ध के शहीद एक भारतीय जवान की इस बेटी के इन चंद शब्दों में युद्ध के खिलाफ बहुत बड़ा संदेश है। लेकिन इस संदेश के भी अपने-अपने अर्थ निकाले गए और उसके खिलाफ अभियान ही छिड़ गया। क्रिकेटर विरेन्दर सहवाग ने सोशल मीडिया पर उसकी नकल उतारते हुए अपनी पोस्ट डाली। एक भाजपा सांसद ने उसकी तुलना दाऊद इब्राहिम से कर दी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लोगों ने तो उसे बुरे नतीजे भुगतने की ही नहीं, बलात्कार तक की चेतावनी दे डाली। कौर का मामला भारत में इन दिनों उठने वाली असहमतियों के प्रति असहिष्णुता का जीता-जागता उदाहरण है। धुर दक्षिणपंथी हिन्दू राष्ट्रवाद के नाम पर उनकी धारा के विरुद्ध कुछ सुनना नहीं चाहते। यहां मुद्दा कारगिल युद्ध नहीं, बल्कि यह है कि क्या उस युद्ध में शहीद हुए जवान की बेटी को अपनी बात कहने का हक भी नहीं। गुरमेहर के खिलाफ अभियान के पीछे वामपंथी छात्र संगठन आइसा और विद्यार्थी परिषद के बीच का पुराना मतभेद और तनातनी है। यह तनातनी बढ़ती जा रही है। बलात्कार और बुरे नतीजे भुगतने की धमकियां मिलने के बाद गुरमेहर ने सोशल मीडिया पर अपने अभियान को बंद कर दिया है। दिल्ली के कॉलेजों में विरोध के स्वर जैसी तेजी पकड़ रहे हैं, वे निर्णायक होंगे। एक तरफ बहुलतावादी लोकतंत्र की समर्थक शक्तियां हैं, जो धर्म व राजनीतिक प्रतिबद्धताओं से अलग सभी के प्रति समान व्यवहार की बात करती हैं। दूसरी तरफ वे लोग हैं, जिन्हें सिर्फ हिन्दुत्व दिखाई देता है और इन्हें कट्टरतावाद के उभार में कोई बुराई नहीं दिखती। धर्मांध कट्टरतावाद का यह उभार भारत तक सामित नहीं है। ट्रंप के अमेरिका से लेकर ब्रेग्जिट, यूरोप में आकार ले रहे अप्रवासी विरोधी माहौल से लेकर पाकिस्तान में ईशनिंदा करने वालों के खिलाफ बढ़ती एकजुटता बताती है कि विश्व में दक्षिण पंथ किस तरह फैल रहा है और जिसकी परिणति गुरमेहर कौर से बदले की धमकी जैसी घटनाओं के रूप में सामने आ रही है।

बोल डेस्क [‘द न्यूज’, पाकिस्तान से साभार]

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