जीलैंडिया: ओझल आठवां महाद्वीप!

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Zealandia
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सोचिए, एक तरफ हम चांद और मंगल पर जा पहुँचे हैं और दूसरी ओर अपने घर ‘पृथ्वी’ के भी सारे रहस्यों को नहीं जान सके हैं। रहस्य कोई छोटा-मोटा हो तो अलग बात है। अगर मानव-सभ्यता के इतने विकसित दौर में जाकर ये जानने को मिले कि अब तक एक पूरा का पूरा महाद्वीप हमारी नज़रों से ओझल था तो क्या कहेंगे आप? जी हाँ, ठीक ऐसा ही हुआ है। बहुत जल्द हमारे बच्चे सात नहीं आठ महाद्वीपों के बारे में पढ़ेंगे और वो आठवां महाद्वीप होगा ‘जीलैंडिया’।

वैज्ञानिकों की मानें तो सात महाद्वीपों के अलावा एक और महाद्वीप है जो पानी से ढका है और अब तक जिसकी पहचान नहीं हो पाई है। ‘द इंडिपेंडेंट’ अखबार के अनुसार यह महाद्वीप न्यूजीलैंड के बिल्कुल नीचे है और इसका अधिकतर हिस्सा दक्षिण प्रशांत महासागर में डूबा हुआ है।

‘जियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ अमेरिका’ जर्नल में छपी रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि जीलैंडिया आठवां महाद्वीप है, जिसका क्षेत्रफल लगभग 50 लाख वर्ग किलोमीटर है और यह ऑस्ट्रेलिया के दो तिहाई के बराबर है। वैज्ञानिकों के अनुसार जीलैंडिया के भूभाग में वे सारी बातें हैं, जो किसी अन्य महाद्वीप में पाई जाती हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार जीलैंडिया का अपना भूशास्त्र है और इसका तल समुद्री तल से कहीं ज्यादा मोटा और कठोर है। यह तीन बड़े भूभागों – न्यूजीलैंड का उत्तरी और दक्षिणी द्वीप और न्यू कैलिडोनिया का उत्तरी हिस्सा – से मिलकर बना है । खास बात ये कि इस प्रस्तावित महाद्वीप का 94 प्रतिशत हिस्सा जल से ढका हुआ है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जीलैंडिया को महाद्वीप मानने के बाद वे यह जानने में सक्षम होंगे कि यह कैसे बना और किस तरह टूट गया। न्यूजीलैंड की संस्था ‘जीएनएस साइंस’ के मुताबिक यह केवल महाद्वीपों की सूची में आठवां नाम जुड़ना भर नहीं होगा, बल्कि इससे महाद्वीपों के बनने के और भी राज खुलेंगे।

बोल डेस्क

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