अब इस ‘हिजाब’ का हिसाब लगाएं

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World Hijab Day Founder Nazma Khan
World Hijab Day Founder Nazma Khan

दुनिया भर की मुस्लिम महिलाओं ने 1 फरवरी को वर्ल्ड हिजाब डे के मौके पर हिजाब पहनकर अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया साइटों पर शेयर कीं और हिजाब से जुड़ी संस्कृति और संस्कारों में अपनी आस्था का परिचय दिया। यहां तक कि गैर मुस्लिम महिलाओं ने भी इस दिन हिजाब पहनकर उनके साथ अपनी एकजुटता दिखाई। मुस्लिम महिलाओं के साथ एकता प्रदर्शित करने के लिए यह एकदम नई और साहसिक पहल है। कहने की जरूरत नहीं कि मुस्लिम आतंकवाद और उसके बरक्स विश्व-परिदृश्य पर डोनाल्ड ट्रंप के उभार के बाद इस पहल का महत्व और भी बढ़ जाता है।

गौरतलब है कि यह अनोखी पहल 2013 में सामाजिक कार्यकर्ता नजमा खान ने की थी और ट्विटर पर हर समाज और वर्ग की महिलाओं को इस मुहिम से जुड़ने के लिए आमंत्रित किया था। उनकी इस मुहिम को पूरी दुनिया से समर्थन मिला और इस साल लगभग 190 देशों की लाखों “ब्यूटीफुल, कॉन्फिडेन्ट, इम्पावर्ड” (बकौल वर्ल्ड हिजाब डे पोस्टर) महिलाओं ने #istand4hijab और #worldhijabday के नाम से हिजाब पहनकर अपनी तस्वीरें ट्विटर और फेसबुक पर अपलोड कीं।

बता दें कि नजमा खान मूल रूप से बांग्लादेश की हैं जिन्हें अमेरिका में पढ़ाई के दौरान अपने हिजाब की वजह से भेदभाव का शिकार होना पड़ा था। वो बताती हैं कि 9/11 के बाद तो उन्हें ओसामा बिन लादेन तक बुलाया जाने लगा था। अपने इन कटु अनुभवों के कारण उन्होंने सामाजिक बदलाव का संकल्प लिया और उसी के तहत वर्ल्ड हिजाब डे की शुरुआत की। अपनी मुहिम के लिए नजमा ने 1 फरवरी का दिन निर्धारित किया और सोशल मीडिया को जरिया बनाया। खास बात यह कि उन्होंने न केवल मुस्लिम बल्कि सभी धर्मों की महिलाओं को इस मुहिम से जुड़ने के लिए आमंत्रित किया ताकि इसे व्यापक रूप मिले और लोगों का नजरिया बदले।

नजमा की पहल को दुनिया भर से किस कदर समर्थन मिला इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2013 में शुरू हुई यह मुहिम पिछले साल यानि 2016 तक 150 देशों तक फैल चुकी थी और इस साल 190 देशों की महिलाओं ने इसमें हिस्सा लिया। आज आलम यह है कि दुनिया भर में इसके हजारों कार्यकर्ता हैं, विद्वान, राजनेता और सेलिब्रिटी समेत समाज के हर तबके के लोग इस पर बात कर रहे हैं, न्यूयॉर्क टाइम्स, बीबीसी, सीएनएन, अल-जजीरा समेत दुनिया भर के मीडिया प्रतिष्ठान वर्ल्ड हिजाब डे को कवर करते हैं और टाइम मैगजीन को इसे अपने वर्ल्ड कैलेंडर में शामिल करना पड़ता है। क्या आप अब भी बोलेंगे कि हिजाब ‘पिछड़ेपन’ का प्रतिनिधित्व करता है?

बोल बिहार के लिए रूपम भारती

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