बिहार के खाते में दो पद्म पुरस्कार

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Swami Niranjanananda Saraswati-Baua Devi
Swami Niranjanananda Saraswati-Baua Devi

केन्द्र सरकार ने इस साल के पद्म पुरस्कारों का ऐलान कर दिया। पद्मविभूषण और पद्मभूषण के लिए इस बार विभिन्न क्षेत्रों की 7-7 हस्तियों को चुना गया, जबकि 75 विशिष्ट लोगों को पद्मश्री से नवाजा गया। इस साल भारतरत्न किन्हीं को नहीं मिला। बिहार की बात करें तो उसके खाते में दो पद्म पुरस्कार आए। मुंगेर स्थित बिहार योग विद्यालय से जुड़े स्वामी निरंजनानंद सरस्वती को पद्मभूषण और मधुबनी की बौआ देवी को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

स्वामी निरंजनानंद सरस्वती प्रख्यात योगगुरु हैं। बिहार स्कूल ऑफ योगा को प्रतिष्ठा दिलाने में इनका अभूतपूर्व योददान है। मूलत: छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव के निवासी स्वामी निरंजनानंद भारत में योग का प्रसार करने से पहले कई देशों में योग शिविर व कार्यशालाओं के माध्यम से योग की शिक्षा दे चुके हैं। साल 1994 में विश्व के पहले योग विश्वविद्यालय ‘बिहार योग भारती’ की स्थापना का श्रेय इन्हें ही जाता है। इनके शिष्य इन्हें आजन्म योगी मानते हैं।

वहीं, पद्मश्री से सम्मानित बौआ देवी मधुबनी पेंटिंग को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए जानी जाती हैं। फिलहाल दिल्ली में रह रहीं 70 वर्षीया बौआ देवी मूल रूप से मधुबनी जिले के जितवारपुर की रहने वाली हैं। अपनी अनूठी कला का प्रदर्शन उन्होंने दुनिया के कई देशों में किया है और सम्मानित हुई हैं। आज उनकी पेंटिंग की ख्याति दुनिया भर में है। उन्हीं की तरह उनकी अगली पीढ़ी भी मिथिला पेंटिंग के प्रति समर्पित है और इस कला को नया आयाम देने में दिन-रात जुटी है।

बोल डेस्क

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