1857 के इतिहास में जुडेगा नया अध्याय

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The Revolt of 1857
The Revolt of 1857

1857 के इतिहास में तिरहुत के 28 शहीदों का नया अध्याय जुड़ेगा। जी हाँ, इतिहास में अब तक पढ़ाए जाने वाले पाठों को नये सिरे से लिखना होगा। देश यह जान सकेगा कि 1857 के विद्रोह में दिल्ली के मूल निवासी एक जमादार वारिस अली को अंग्रेजों ने पटना के दानापुर कैंट में फांसी दे दी थी। इसी दौरान पकड़े गए 27 अन्य लोगों को काला पानी की सजा दी गई थी। जिला प्रशासन ने इन्हें शहीद व स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा देने की अनुशंसा गृह विभाग से कर दी है।

बता दें कि बड़कागांव के लोगों को जिला अभिलेखागार से वह अभिलेख खोजने में सफलता मिली है जिसमें तिरहुत जिले के 27 रणबांकुरों को काला पानी की सजा दी गई थी। फैसले की प्रति ऑफिसियेटिंग जज एएल डम्पायर के हस्ताक्षर से जारी है। इस दस्तावेज में बताया गया है कि 22 जून 1857 को बड़कागांव के रामदेव शाही, केदार शाही, छद्दु शाही, किसना शाही, तिलक तिवारी, शिवदुल डुर्मी, नाथू शाही, छठ्ठु शाही, हंसराज शाही, शोभा शाही, बिजनाथ तिवारी, तिलक शाही, पुनदेव शाही, कीर्ति शाही, छतरधारी शाही, दर्शना शाही, रौशन शाही आदि को मुजफ्फरपुर के तत्कालीन थानेदार डुमरीलाल ने बिना हथियार गिरफ्तार किया था। इन्हें 18 सितंबर 1857 को आजीवन काला पानी की सजा देने के साथ ही उनकी संपत्ति जब्त करने का फैसला सुनाया गया था। इनके अलावा शेख कुर्बान अली को तीन साल के लिए काला पानी की सजा दी गई थी।

इस पूरे प्रकरण में शहीद वारिस अली एक अलग कोण हैं। शहीद खुदीराम बोस से पहले भी तिरहुत में किसी को फांसी दी गई, ऐसा इतिहास में नहीं पढ़ाया जाता। लेकिन, 23 जुलाई 1857 को कमिश्नर  विलियम टेलर ने बंगाल सरकार के सचिव को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने बताया है कि वारिस अली को देशद्रोह के जुर्म में 6 जुलाई 1857 को फांसी दे दी गई। वह पत्र बिहार अभिलेखागार में अभी भी सुरक्षित है और राज्य सरकार द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘गदर इन तरहुत ए डाक्यूमेंटेंशन’ में इसका जिक्र भी है।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                              बोल डेस्क

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