इनमें है दुनिया बदलने का माद्दा

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ब्रिटिश समाचार वेबसाइट ‘द गार्जियन’ ने दुनिया भर के 25 किशोरों की सूची तैयार की है। ये किशोर कलाकार, खिलाड़ी, वैज्ञानिक और उद्यमी हैं जो अपने कौशल से दुनिया में बदलाव ला सकते हैं। इन किशोरों में कुछ ने कम उम्र में ही महत्वपूर्ण आविष्कार किए हैं। हम भारतीयों के लिए गर्व की बात है कि इस विशिष्ट सूची में तीन भारतीय मूल के किशोर भी शामिल हैं। अमेरिका के पेंसिलवेनिया में रहने वाले मिहिर गारीमेला, कैलिफोर्निया में रह रहे शुभम बनर्जी और सुरे में रह रहे नित्यानंदम को उनके नायाब आविष्कारों के लिए सराहा गया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की छोटी बेटी साशा ओबामा की भी उनके सामाजिक कार्यों के लिए प्रशंसा की गई है।

मिहिर गारीमेला

10वीं में पढ़ने वाले 16 वर्षीय मिहिर ने एक रोबोट तैयार किया है। इस रोबोट में मधुमक्खियों की आवाज़ की तरह साउंड सिस्टम लगाया गया है। यह रोबोट मक्खियों की तरह ही हर बाधा को पार कर उड़ने में सक्षम है। इसका इस्तेमाल बचाव कार्यों और आपदा प्रबंधन में किया जा सकता है। मिहिर को उनके आविष्कार के लिए साल 2014 का गूगल कम्प्यूटर साइंस अवार्ड मिल चुका है। मिहिर एक गणितीय रोबोटिक वायलिन पर भी काम कर रहे हैं जो दिमाग के इलाज के समय डॉक्टरों की मदद कर सकता है।

शुभम बनर्जी

15 वर्षीय शुभम ने स्कूल साइंस प्रोजेक्ट के तहत खेल में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के लीगो ब्रिक्स से दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल प्रिंटर तैयार किया है। उनकी इस खोज ने दृष्टिबाधित लाखों लोगों के लिए कम्प्यूटर का इस्तेमाल आसान कर दिया। ब्रेल प्रिंटर से इंटरनेट या कम्प्यूटर पर टाइप की हुई चीजें ब्रेल लिपि में प्रिंट हो सकती हैं।

नित्यानंदम

15 साल के नित्यानंदम ने अल्जाइमर बीमारी का पता लगाने के लिए एक नया एंटीबायोटिक तैयार किया है। इस एंटीबायोटिक की मदद से 10 साल पहले ही अल्जाइमर का पता लग सकता है। एंटीबायोटिक में मौजूद फ्लूरोसेंट के कण दिमाग की परत को स्कैन कर भविष्य में होने वाले अल्जाइमर का पता लगा लेते हैं। नित्यानंदम के मुताबिक उनकी खोज उन माता-पिता के लिए कारगर है जिनके बच्चे को अल्जाइमर का खतरा हो सकता है। वे पहले ही अपने बच्चे का इलाज शुरू कर सकते हैं और समय रहते इस बीमारी से रक्षा हो सकती है। नित्यानंदम को इस खोज के लिए 2015 का गूगल साइंस फेयर प्राइज भी मिल चुका है।

बोल डेस्क

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