राष्ट्रपिता के विचारों को स्वर देती तारा

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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पौत्री और देश की जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता तारा गांधी भट्टाचार्य ने पटना में शुक्रवार को भाषा और अभिव्यक्ति पर मंडरा रहे खतरों के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा कि बापू भाषा पर बहुत ध्यान देते थे, लेकिन आज कम्प्यूटर के युग में नौजवानों की जुबान खो गई है। उनमें ज्यादातर तो एक पंक्ति भी नहीं लिख पाते। यह गंभीर स्थिति है।

बता दें कि श्रीमती गांधी ने उक्त विचार पटना के श्रीकृष्ण मेमेरियल हॉल में आयोजित दो दिवसीय शिक्षा दिवस समारोह में व्यक्त किए। देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की स्मृति में आयोजित होने वाला यह समारोह इस बार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और शिक्षा तथा बिहार में विज्ञान विषय पर केन्द्रित था। इस समारोह में बिहार के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी, केरल के शिक्षाविद केके कृष्णकुमार समेत शिक्षा विभाग के तमाम आला अधिकारी मौजूद थे। इस खास अवसर पर प्रो. विनय कंठ को मौलाना अबुल कलाम आजाद शिक्षा पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया।

बहरहाल, अपने महत्वपूर्ण संबोधन में तारा गांधी ने अपने पितामह महात्मा गांधी के विचारों को आज के संदर्भ में स्वर दिया। श्रीमती गांधी ने कहा कि कम्प्यूटर जरूर सीखो लेकिन लिखना-पढ़ना मत छोड़ो। उन्होंने जोर देकर कहा कि साक्षरता और शिक्षा दो अलग-अलग चीजें हैं। शिक्षा वह है जो हमारे मानस को हिंसाविहीन रखे। आज हर तरफ मची विकास की अंधी दौड़ पर उन्होंने कहा कि विकास के चक्कर में हमने अपनापन खो दिया है। हरियाली खो दी है। शहरों के विकास का मतलब पांच सितारा होटलों की चेन या फिर ट्रैफिक जाम नहीं होना चाहिए। विकास के लिए सकारात्मक सोच जरूरी है। मानव विकास सबसे बड़ा विकास है।

जनतंत्र में आम जनता की ताकत को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि नागरिकों में जो शक्ति है वह सरकारों में नहीं होती। वैसे मातृशक्ति को उन्होंने सबसे बड़ी शक्ति बताया। बकौल तारा यह शक्ति हर स्त्री-पुरुष और जीव में होती है। मातृशक्ति का थोड़ा अंश भी किसी में चला जाए तो वह हिंसा नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि आज तक जितने भी आतंकवादी हुए हैं उन्होंने अपने बचपन में भयंकर त्रासदियां झेली होंगी। इसलिए जरूरी है कि हम बच्चों और युवाओं में दया, सहानुभूति का ऐसा उदाहरण बीजारोपित करें जो जीवन भर उनकी स्मृतियों में रहे।

शांति को बढ़ावा देने तथा एकता, संस्कृति, शिक्षा और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए इसी साल फ्रांस का शीर्ष सम्मान ‘द ऑर्डर ऑफ आर्ट्स एंड लेटर्स’ पाने वालीं 82 वर्षीया तारा गांधी बिहार आकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काम की तारीफ करना नहीं भूलीं। उन्होंने उनके सपनों के साकार होने की कामना भी की। गौरतलब है कि श्रीमती गांधी का बिहार से पुराना नाता है। उनके पिता दिवंगत देवदास गांधी 1914 में बिहार आए थे और उन्होंने यहीं हिन्दी बोलना सीखा था। श्रीमती गांधी को भी हिन्दी और भोजपुरी में बोलना प्रिय है।

बोल बिहार के लिए रूपम भारती

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