बिहार बोर्ड का बड़ा बदलाव

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बिहार बोर्ड ने इंटरमीडिएट परीक्षा में आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स की बाध्यता खत्म कर दी है। यानि अब स्ट्रीमवाइज पढ़ाई नहीं होगी, सिर्फ इंटरमीडिएट होगा। छात्र अब मनचाहा विषय लेकर इंटर कर सकेंगे और उन्हें ‘इंटरमीडिएट’ की डिग्री दी जाएगी। आईए, आईएससी और आईकॉम के संकायों में उन्हें बांटा नहीं जाएगा। यह महत्वपूर्ण फैसला शनिवार को बोर्ड की गवर्निंग बॉडी की बैठक में लिया गया। अब इस आशय का प्रस्ताव राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। सरकार से मंजूरी मिलते ही वर्ष 2018 से इसे लागू कर दिया जाएगा।

गौरतलब कि इंटर का नया सिलेबस 2007-09 में ही तैयार किया गया था, जिसमें पहले से ही उक्त व्यवस्था है। इस व्यवस्था को शिक्षा विभाग से अनुमोदन भी प्राप्त है, पर इसे लागू नहीं किया जा सका था। नए सिलेबस के अनुसार छात्रों को भाषा समूह से कोई दो तथा वैकल्पिक विषयों में से कोई तीन विषय रखना होगा। साथ ही एक ऐच्छिक विषय रखने की सुविधा होगी, जो अनिवार्य नहीं होगा।

बता दें कि भाषा समूह में कुल 12 भाषाएं – हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, संस्कृत, भोजपुरी, बांग्ला, मैथिली, मगही, अरबी, फारसी, पाली तथा प्राकृत – होंगी, जबकि वैकल्पिक विषयों की संख्या 19 होगी। ये वैकल्पिक विषय हैं – गणित, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, गृह विज्ञान, रसायनशास्त्र, कम्प्यूटर साइंस, इतिहास, राजनीतिशास्त्र, भूगोल, संगीत, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र, बिजनेस स्टडीज, एकाउंटेंसी, इंटरप्रेन्योरशिप, मल्टीमीडिया एवं वेब टेक्नोलॉजी तथा योग एवं शारारिक शिक्षा।

बिहार बोर्ड ने देर से ही सही लेकिन दुरुस्त निर्णय लिया है। सीबीएसई और आईसीएसई में यह व्यवस्था पहले से ही थी। आज पूरी दुनिया में इसी पैटर्न पर पढ़ाई हो रही है। उम्मीद की जानी चाहिए कि बोर्ड के इस बड़े बदलाव से बिहार के छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। अब लकीर का फकीर बनने की कोई बाध्यता नहीं होगी उनके सामने। अपनी रुचि, प्रतिभा और आवश्यकता के अनुरूप वे विषयों का चयन कर सकेंगे। तेज रफ्तार ज़िन्दगी और गलाकाट प्रतियोगिता के इस दौर में उनकी क्षमता और श्रम का समुचित उपयोग होगा, ये बड़ी बात है।

बोल बिहार के लिए डॉ. ए. दीप

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