हिन्दी: एक लघु कविता

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hindi-diwas
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माँ की गोद
बापू की लाठी
सुहागन के सिन्दूर की लाली
रविशंकर के सितार का स्वर
भोर का पहर
नहाने के बाद की अनुभूति
और हिन्दी।

मेरे अन्दर
बहुत अन्दर
सांस लेती
हिन्दी।

1994 में लिखी डॉ. ए. दीप की कविता

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