श्रीलंका मलेरियामुक्त और हमें मच्छर मार रहे..?

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malaria-mosquito
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बीते सोमवार श्रीलंका मलेरियामुक्त देश घोषित हो गया। इस उपलब्धि पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 6 सितंबर को उसे प्रमाणपत्र दिया। दक्षिण-पूर्व एशिया में मालदीव के बाद श्रीलंका मलेरियामुक्त दूसरा देश है। मालदीव 1984 में मलेरियामुक्त हुआ था।

श्रीलेका की ये उपलब्धि कितनी बड़ी है इसका अंदाजा हम इस आंकड़े से लगा सकते हैं कि 1999 में वहाँ मलेरिया के 2,64,549 मामले सामने आए थे जिसके बाद श्रीलंका ने एक के बाद एक कई कारगर कदम उठाए और नतीजा ये रहा कि 2008 के बाद सालाना एक हजार से कम मामले सामने आए। आखिरी मामला अक्टूबर 2012 में आया और नवंबर आते-आते यह शून्य हो गया। पिछले साढ़े तीन साल से एक भी मामला सामने नहीं आया।

इसके बरक्स हम अपनी स्थिति देखें। भारत में साल दर साल मच्छरजनित मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) जैसी बीमारियों से मौतें बढ़ रही हैं। दक्षिण एशिया में मलेरिया से होने वाली  70% मौतों में से 69% मौतें भारत में होती हैं। इसी साल की बात करें तो हमारे देश में जुलाई तक मलेरिया के 4,71,083 मामले सामने आए, जिनमें 119 की मौतें हुईं। डेंगू, चिकनगुनिया और जेई के 31 अगस्त तक उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि इनके क्रमश: 27,889, 12,555 और 688 मामले सामने आए जिनमें सैकड़ों लोगों ने अपनी जान गंवाई।

बता दें कि केन्द्र सरकार ने साल 2030 तक मलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य रखा है, पर हमारे अभियान में अपेक्षित सघनता और इच्छाशक्ति की कमी दिखती है। हमें श्रीलंका से सीख लेने की जरूरत है जिसने इसके लिए देश भर में ठोस अभियान चलाया और पर्यटकों तक की नियमित स्वास्थ्य जाँच कराई। वहाँ 24 घंटे हॉटलाइन स्थापित कर रोगियों की पहचान की गई और शीघ्र इलाज किया गया। मच्छररोधी नियंत्रण की जगह परजीवी नियंत्रण की व्यापक रणनीति अपनाई गई। इसके लिए सफाई का खास ध्यान रखा गया और एकीकृत प्रबंधन की व्यवस्था कर समुदायों को जोड़ा गया।

अब हम खुद से सवाल करें कि मलेरिया-उन्मूलन के लिए श्रीलंका ने जो कसौटी अपनाई, क्या हम उस पर खरे उतरते हैं? जाहिर है कि हमारा जवाब ‘ना’ होगा। अगर हम 2030 में मलेरिया-उन्मूलन का लक्ष्य हासिल कर लेते हैं तो भी इस मामले में हम श्रीलंका से 14 साल पीछे ठहरेंगे, पर अभी हम जिस रफ्तार में चल रहे हैं उसे देखते हुए हमारा ‘वनवास’ 14 साल से बढ़ भी जाए तो कोई आश्चर्य की बात नहीं।

बोल बिहार के लिए रूपम भारती

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