‘जलप्रलय’ के मुहाने पर बिहार

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Flood in Bihar
Flood in Bihar

बिहार में बाढ़ का तांडव जारी है। वर्षों बाद इलाहाबाद से पटना तक गंगा गरज रही है। राजधानी पटना समेत आस-पास के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं। पटना शहर पर भी गंगा के कहर का खतरा मंडरा रहा है। नदी से सटे कई क्षेत्रों में पानी भर जाने के कारण दीघा-कुर्जी इलाके के सभी स्कूलों को एहतियात के तौर पर दो दिन के लिए बंद कर दिया गया है।

जहाँ तक पटना जिले की बात है, हजारों एकड़ की फसल बर्बाद हो चुकी है और सैकड़ों लोग बेघर हो चुके हैं। दीदारगंज, मोकामा और बख्तियारपुर में एनएच 31 पर गंगा का पानी बहने लगा है। दियारा इलाके में पानी घटने का इंतजार कर रहे लोग अब घरों को छोड़ सुरक्षित स्थान पर जाने को विवश हैं।

उधर गया से नवादा को जोड़ने वाले एनएच 82 का कुछ हिस्सा अचानक आई बाढ़ से बह गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एनएच 82 को पूरी तरह बंद कर देना पड़ा। बता दें कि बाढ़ के कारण पटना-छपरा का सड़क-सम्पर्क भी टूट गया है। डोरीगंज के पास नेशनल हाईवे पर पानी बह रहा है और छपरा शहर में बाढ़ का पानी घुसने लगा है।

आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी बयान के मुताबिक बक्सर, भोजपुर, पटना, वैशाली, सारण, बेगूसराय, समस्तीपुर, लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार में कमोबेश बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। इनमें पटना, वैशाली, भोजपुर और सारण जिले के दियारा क्षेत्र बाढ़ से अधिक प्रभावित हैं। इस सूची में सीमांचल और कोसी यानि पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, सुपौल, मधेपुरा और सहरसा जैसे जिलों को जोड़ लें जहाँ के लोग हर साल की तरह इस साल भी बाढ़ की त्रासदी और वो भी कई दिनों पहले से झेल रहे हैं तो सहज अनुमान किया जा सकता है कि बिहार कितने मुश्किल दौर से गुजर रहा है! इन इलाकों में कई लोग बाढ़ में अपनी जान गंवा चुके हैं और लाखों बेघर हैं सो अलग।

केन्द्रीय जल आयोग ने गंगा के मैदानी भाग में स्थित तमाम जिलों को चेतावनी दी है कि अगले पाँच दिन में जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है। गौरतलब है कि बिहार में गंगा के साथ-साथ पुनपुन, घाघरा, बूढ़ी गंडक और सोन जैसी नदियां भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

बिहार में जारी बाढ़ की विभीषिका के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कल इससे जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात उठाई कि बाढ़ की यह स्थिति फरक्का बांध बनने के बाद गंगा में जमा हो रहे गाद के कारण बनी है। उन्होंने केन्द्र सरकार से मांग की कि या तो इस बांध को तोड़ दिया जाए या फिर गाद मैनेजमेंट की पॉलिसी तैयार की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि गाद प्रबंधन के बिना नमामि गंगे परियोजना भी सफल नहीं हो सकती।

बहरहाल, राज्य में बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बचाव और राहत कार्यों की कमान स्वयं संभाल रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में 1,326 नावों का संचालन किया जा रहा है और 82 राहत शिविर लगाए गए हैं, जिनमें 15,000 से ज्यादा लोग रह रहे हैं।

बोल बिहार के लिए डॉ. ए. दीप

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