ओमरान की आँखों से सीरिया का सच

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Omran Daqneesh
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क्या आप ओमरान दक्नीश को जानते हैं? यकीनन आपमें से ज्यादातर लोग उसके नाम से वाकिफ नहीं होंगे, लेकिन अगर आपके हाथ में स्मार्ट फोन है या इंटरनेट से आपका दूर का भी वास्ता है या देश-दुनिया की ख़बरों में आपकी थोड़ी-सी भी रुचि है तो ऊपर दी गई तस्वीर को पहचान जरूर लेंगे। खून और मिट्टी से सना ये पाँच साल का बच्चा ओमरान दक्नीश है, जो एंबुलेंस में बैठा है और जिसकी सूनी आँखें जंग से कराहते सीरिया का सच बयां कर रही हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी ये तस्वीर सीरिया के मौजूदा हालात का प्रतीक बन गई है।

आप सोच रहे होंगे कि इस मासूम बच्चे को आखिर किस गुनाह की सजा मिली है? तो जान लें कि इस बच्चे का गुनाह ये है कि इसका घर सीरिया के ‘विद्रोहियों’ के इलाके में मौजूद है और ये ‘गुनाह’ इस बात के लिए काफी है कि सीरियन आर्मी और रूस उसके घर पर हवाई हमला कर सकें। बता दें कि अलेप्पो मीडिया सेंटर ने इस पूरी घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया है।

वैसे ये कहानी केवल ओमरान दक्नीश की नहीं। ओमरान तो फिर भी खुशकिस्मत है कि जीवित है। आप याद करें अयलान कुर्दी को। एक तीन साल का बच्चा जो सितंबर 2015 में अपने माता-पिता के साथ सीरिया से भागकर यूरोप आ रहा था कि नाव पलट गई और उसकी नन्ही-सी लाश बहकर समुद्र के किनारे आ लगी। अयलान ने अपने पिता से आखिरी शब्द कहे थे – “मैं आपका हाथ नहीं पकड़ूँगा, आप मेरा हाथ पकड़ो पापा, मेरा हाथ छूट जाएगा”…। हाथ सचमुच छूट गया था और समुद्र के किनारे बहकर आई उस नन्ही-सी लाश का वजन पूरी दुनिया ने अपनी छाती पर महसूस किया था।

सीरिया सब दिन ऐसा नहीं था। कभी इसे समृद्ध देशों में शुमार किया जाता था। पर इसकी खुशहाली को किसी की नज़र लग गई। आज आईएसआईएस, रेबल ग्रुप, सीरियन सरकार, नाटो और रशियन आर्मी ने इसे जंग के मैदान में तब्दील कर दिया है। इस जंग में अब तक करीब डेढ़ लाख लोग मारे गए हैं और  एक करोड़ से ज्यादा लोगों को विस्थापन झेलना पड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक अब तक 76 लाख लोग भागकर यूरोप के देशों में पहुँचे हैं और ये अभी भी लगातार जारी है।

सीरिया का ये संकट साल 2011 में वहाँ की बशर अल असद के नेतृत्व वाली ‘बाथ सरकार’ के समर्थकों और विरोधियों के बीच सशस्त्र संघर्ष से शुरू हुआ था, जो अब विध्वंशकारी रूप ले चुका है। विद्रोही चाहते हैं कि राष्ट्रपति असद पदत्याग करें और बाथ पार्टी के शासन का अंत हो। कहने को यह सीरिया का गृहयुद्ध है पर वास्तविकता यह है कि सीरिया को लेकर पूरी दुनिया दो खेमों में बंट गई है। अपने-अपने हितों को देखते हुए एक ओर रूस और ईरान जैसे देश इस बात पर अड़े हैं कि बशर अल असद ही सीरिया के राष्ट्रपति बने रहेंगे तो दूसरी ओर अमेरिका, सऊदी अरब और तुर्की जैसे देश हैं जो सीरिया के असदविरोधी गठबंधन ‘नेशनल कोएलिशन’ के समर्थक हैं और उनकी हर संभव मदद कर रहे हैं।

सीरिया संकट एशिया की दो महाशक्तियों भारत और चीन की विदेश नीति की परीक्षा भी है। अपने-अपने व्यापारिक हितों के कारण दोनों देश इस मुद्दे पर खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं लेकिन किसी भी सैनिक कार्रवाई का विरोध करते रहे हैं।

बहरहाल, कूटनीति अपनी जगह है और संवेदना अपनी जगह। हो सकता है सीरिया के विद्रोहियों की हर ‘मांग’ जायज और राष्ट्रपति बशऱ अल असद की हर ‘इनकार’ नाजायज ना हो। लेकिन इन सबमें अयलान कुर्दी या ओमरान दक्नीश का क्या कसूर?  मानवीय संवेदना को मारकर हमने तख्तोताज हासिल भी कर लिया तो क्या? अयलान की मुंदी हुई और ओमरान की सूनी पड़ी आँखें क्या हमारी ‘कंगाली’ की गवाही नहीं दे रही होंगी?

 ‘बोल बिहार के लिए डॉ. ए. दीप

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