सच: तीन छोटी कविताएं

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Truth
Truth

सच: 1

एक सच मेरा
एक सच तुम्हारा
एक वो सच
जो चुप कर देता है
हमदोनों को

हमेशा रहता है मौजूद
ना दिखनेवाला सच
चुप रहने
और चीखने के बीच।

सच: 2

सच
सच है
उसे छिपाना क्यों है ?

सच
सच है
उसे बताना क्यों है ?

सच: 3

कौन मानेगा
मेरे झूठ का सच
कि मैं बोलता रहा हूँ उसे
सच को
सच बनाए रखने की खातिर !

डॉ. ए. दीप की कविता

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