गाय से वोट दूहने की राजनीति

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Narendra Modi and Lalu Prasad Yadav
Narendra Modi and Lalu Prasad Yadav

लालू तंज कसने में कभी नहीं चूकते, बस मौका मिलना चाहिए। और जब सामने प्रधानमंत्री मोदी हों तो कहना ही क्या। अब जबकि छोटे भाई नीतीश के लिए उनका सत्रह साल पुराना ‘प्रेम’ फिर से जग गया है, कांग्रेस से भी ‘अपनापा’ है, मांझी पर ‘डोरे’ ही डालने में लगे हैं और रामविलास समेत बाकी लोगों की खास चिन्ता उन्हें है नहीं, तो बचता भी कौन है भाजपा और नरेन्द्र मोदी के सिवा। हाँ, नेता तो प्रदेश भाजपा के भी कई हैं लेकिन उन्हें ना तो लालू और ना नीतीश तंज कसने के ‘लायक’ मानते हैं।

बहरहाल, ताजा मामला प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान से जुड़ा है जिसमें उन्होंने कहा था कि गाय की रक्षा के नाम पर असामाजिक तत्व अपनी दुकान चला रहे हैं। राजद सुप्रीमो ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि आखिरकार मोदीजी को ये बात समझ आ गई कि गाय दूध देती है, वोट नहीं।

बता दें कि प्रधानमंत्री ने बीते शनिवार गोरक्षा के नाम पर गुजरात के ऊना में दलितों की पिटाई के संदर्भ में बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि गोरक्षा के नाम पर असामाजिक तत्व अपनी दुकान चला रहे हैं। ऐसे लोगों पर उन्हें गुस्सा आता है। कुछ लोग पूरी रात एंटी सोशल एक्टिविटी करते हैं लेकिन दिन में गोरक्षक का चोला पहन लेते हैं। उन्होंने राज्य सरकारों कहा कि ऐसे जो स्वयंसेवी निकले हैं उनका जरा डोजियर तैयार करें, इनमें से 70-80 फीसदी एंटी सोशल एलिमेंट निकलेंगे।

इतना सुनना था कि लालू ने बिना देर किए अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा – “नागपुर वालों, यह सत्य की विजय और पाखंड की पराजय है। लगता है मेरे द्वारा दो दिन पहले कही गई बात मोदीजी को अच्छे से समझ में आ गई कि गाय दूध देती है, वोट नहीं।“ लालू ने आगे लिखा – “गौमाता इनकी सरकार बनवाना तो दूर, बनी बनाई सरकारों को हिला रही है। ये हमारी जीत और उनकी हार है।“

लालू आखिर लालू ठहरे। वो इतने पर भी नहीं रुके। उन्होंने ये भी कह डाला कि “गौमाता के नाम पर बेवकूफ बनाने चले थे, अब दाँव उल्टा पड़ गया तो भाषा बदल रही है।… आप लोग बिहार चुनाव में कैसे बड़े-बड़े विज्ञापन निकालते थे। ये उन विज्ञापनों की पराकाष्ठा थी कि चुनाव में दाल नहीं गली। हाँ, अब आपका दल जरूर गल जाएगा।”

ये सही है कि प्रधानमंत्री का बयान एक मायने में ‘विरोधाभासी’ है। उनके इस बयान से संघ, उनकी अपनी पार्टी का संगठन और केन्द्र से लेकर राज्य सरकारों में बैठे उनके कई लोग ‘कठघरे’ में खड़े हो जाएंगे। बिहार चुनाव में महागठबंधन को और खासकर लालूजी की पार्टी को जैसी सफलता मिली उसे देखते हुए लालू का ये कहना कि “बिहार चुनाव में भाजपा की दाल नहीं गली” भी गलत नहीं है, लेकिन तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद फिलहाल दिन-ब-दिन ‘बड़ी’ होती भाजपा के लिए ‘गल’ जाने की बात हजम नहीं होती। लालूजी और उनके छोटे भाई अक्सर भूल जाते हैं कि बिहार से बाहर जहाँ और भी हैं। और हाँ, लालूजी से ये पूछना भी बनता है कि क्या उनके गठबंधन, उनके दल और खास तौर पर उनके लिए क्या सचमुच ‘गाय’ ने केवल दूध ही दिया है अब तक, कभी वोट नहीं दिलाए..?

बोल बिहार के लिए डॉ. ए. दीप

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