बौद्धिक आतंकवाद: आतंक का नया रूप

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France Truck Attack
France Truck Attack

आज तकनीक ने पूरी दुनिया को एक छोटे से गांव में तब्दील कर दिया है। किसी भी देश के एक कोने से दूसरे देश के कोने तक लोगों को एक-दूसरे के बारे में सारी जानकारियां मिल रही हैं। सारे देश एक मंच पर आ गए हैं। लेकिन, इन सबके बावजूद ‘नफरत’ का व्यापार भी तेजी से बढ़ रहा है। इस ‘नफरत’ ने पूरी दुनिया में आतंक को तेजी से फैलाया है। आज दुनिया का हर देश आतंक से प्रभावित है और अब इस आतंक ने नए-नए चोले धारण कर मानवता का शिकार करना शुरू कर दिया है।

पहले जहां आतंकवादी लोगों को बम और गोलियों से नुकसान पहुंचाते थे। वहीं अब वो उन पर ट्रक तक चलाने से गुरेज नहीं करते। ये खूनी आतंकवाद का एक बहुत ही घिनौना चेहरा है। फ्रांस के नीस शहर में बास्टिले डे परेड के दौरान जिस तरह एक आतंकवादी ने हजारों लोगों की भीड़ पर ट्रक चढ़ा दिया उसकी जितनी भर्त्सना की जाये वो कम है। लोग चीखते-चिल्लाते रहे और बेरहम कातिल ने किसी का लिहाज नहीं किया। इस घटना में 84 लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। कातिल महज 31 साल का युवक था। उसके वंशज ट्यूनिशिया से आकर फ्रांस में बस गए थे। वो अपराधी था और कई आपराधिक मामलों में उसकी संलिपत्ता थी। लेकिन, वो आतंकवादी निकलेगा इसकी किसी ने कल्पना तक ना की थी।

इधर कुछ सालों में पूरी दुनिया में आतंक ने अपने पैर तेजी से पसारे हैं। पहले युवकों को जबरदस्ती आतंकवादी बनने पर मजबूर किया जाता था। वहीं अब उसकी जगह बौद्धिक आतंकवाद ने ली है। इस्लामिक स्टेट की परिकल्पना के लिए ‘शहादत’ देने को तैयार ये युवक पहले बरगलाये जाते हैं और फिर धर्म के नाम पर उनका ‘ब्रेनवॉश’ कर उन्हें आतंक की दुनिया में उतार दिया जाता है। आतंकी संगठन अलकायदा आतंकवादी तैयार करता था और अब आईएसआई साधारण लोगों को हिंसा पर चलने के लिए नैतिकता का हवाला देकर उकसाता है। आईएसआई महज हत्यायें नहीं करवाता। बल्कि ये सभ्य समाज के बीच के लोगों को बर्बरता सिखाता है और उसे बेकार के तर्कों के द्वारा सही ठहराने की कोशिश करता है।

कुछ सालों पहले आतंक की वजह गरीबी, अशिक्षा और मदरसों को ठहराया जाता था। लेकिन, अब ये पब्लिक स्कूल, फाईव स्टार होटलों और कोठियों से निकल रहे हैं। किशोर ‘स्लीपर’ के रूप में ये बौद्धिक आतंकवादी इंटरनेट के जरिये आतंक को बढ़ावा दे रहे हैं। वैचारिक संक्रमण से ग्रस्त युवाओं को बरगलाने के लिए धर्म को हथियार बनाया जा रहा है।

दरअसल, आतंक जब हथियारों और गोला-बारूद से आगे बढ़कर वैचारिक स्तर पर आ जाये तो खतरा ज्यादा बड़ा हो जाता है। ऐसे लोगों को खोजना मुश्किल हो जाता है जो आम लोगों के वेश में अपनों के बीच बैठकर षड्यंत्र रचते हैं। आज सोशल मीडिया का जितना इस्तेमाल अच्छाई के लिए किया जा रहा है उससे ज्यादा इसका दुरुपयोग किया जा रहा है और जब आतंक विचारों के जरिये फैलाया जाता है तो वो तेजी से फैलता है और भयानक मार-काट भी मचाता है।

इसलिए आज जरूरत है पूरी दुनिया के एकजुट होने की। सख्त नियम-कानून, सतर्कता के साथ-साथ युवाओं पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। युवाओं को रचनात्मक और सामाजिक कार्यों में व्यस्त रखकर ही उनकी बौद्धिकता को सही दिशा दी जा सकती है। तभी ये संसार आतंक से मुक्त हो पायेगा और हर कहीं शांति और सुख का राज होगा।

बोल बिहार के लिए प्रीति सिंह

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