हताश नवाज का ‘बुरहान कार्ड’

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कश्मीर में पिछले एक हफ्ते से हिंसा का दौर जारी है। अभी भी घाटी के 10 जिलों में कर्फ्यू लगा हुआ है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी जगह-जगह भारत विरोधी नारेबाजी कर रहे हैं। कुपवाड़ा में पुलिस चौकी पर पेट्रोल बम से हमला कर आग लगाने की कोशिश की गई। जान बचाने के लिए पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। अब तक घाटी में 43 लोगों की मौत हुई है। जबकि सुरक्षा बलों के 1500 जवान सहित 3140 लोग घायल हुए हैं।

ये सारा हंगामा आतंकी बुरहान वानी की मौत पर किया जा रहा है जिसे एक हफ्ते पहले सेना के जवानों ने मार गिराया था। बुरहान आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन का कमांडर था। महज 15 साल की उम्र में उसने इस आतंकी संगठन को ज्वाइन किया था। हिजुबल मुजाहिद्दीन के इस ‘पोस्टर ब्वॉय’ पर सरकार ने 10 लाख रूपये का ईनाम रखा था। महज 22 साल के बुरहान वानी ने घाटी में कई आतंकी वारदातों को अंजाम दिया था और कश्मीर के युवकों को बरगला कर आतंक के रास्ते पर ले जाने में उसे महारत हासिल थी।

बुरहान की मौत के बाद से ही घाटी में उसके समर्थकों ने हिंसा फैला रखी है। इन उत्पातियों को पाकिस्तान अपने भड़काऊ बयान से हवा देने में लगा है। पाकिस्तान शुरू से घाटी में आतंकवाद को बढ़ावा देने और लोगों को उकसाने में आगे रहा है। कश्मीर को हथियाने के लिए उसने हमेशा शातिर दांव-पेंच खेले हैं। इस मसले को बेवजह उछालकर वो भारत को दुनिया भर में बदनाम करने की कोशिश करता रहा है। इसी कड़ी में उसने आतंकी बुरहान वानी की मौत के खिलाफ 20 जुलाई को ‘ब्लैक डे’ मनाने की घोषणा की है। ये वही पाकिस्तान है जिसने तब ‘ब्लैक डे’ नहीं मनाया था जब आतंकियों ने उनके अपने घर में घुसकर निर्दोष स्कूली बच्चों का कत्लेआम किया था।

दरअसल, आतंकवादियों को पनाह देने की वजह से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान अलग-थलग पड़ चुका है। अमेरिका ने भी उससे अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ अपने ही देश में बेगाने हो गए हैं। उनकी सेना से नहीं बन रही और पनामा पेपर्स के जरिये भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद उनकी स्थिति और भी कमजोर हो गई है। देश के अलग-अलग शहरों में पोस्टर्स लगाकर सेना प्रमुख राहिल शरीफ से तख्ता पलट की अपील की जा रही है। कुल मिलाकर पाकिस्तान के अंदरूनी हालात बेहद खराब हैं। ऐसे में अपनी छवि चमकाने और पाकिस्तान की जनता का ध्यान समस्याओं से बंटाने के लिए नवाज शरीफ ‘बुरहान कार्ड’ खेलने की ओछी हरकत कर रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं है जब नवाज शरीफ और वहां की चुनी सरकार अपनी मुसीबतों का हल कश्मीर मुद्दे को हवा देकर निकालने की कोशिश कर रही है। इससे पहले भी वहां के हुक्मरान यही करते रहे हैं।

हालांकि पाकिस्तान को अपने इस घटिया प्रयास के लिए तब मुंह की खानी पड़ी जब अमेरिकी सांसदों ने आतंकी बुरहान वानी को ‘नेता’ बताने वाले नवाज शरीफ के बयान की निंदा की। लेकिन, इसके बाद भी नवाज शरीफ अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे। उन्होंने आतंकी बुरहान वानी सहित सभी कश्मीरी आंतकियों को “आजादी के लिए लड़ने वाला” बताया है। नवाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर में ‘मानवाधिकार हनन’ का मामला भी उठाया। हालांकि, उनके इस कुत्सित प्रयास को भारत के राजदूत सैयद अकबरूद्दीन ने असफल कर दिया।

इन सबके बावजूद पाकिस्तान सुधरने का नाम नहीं ले रहा। अपने देश की दिन-ब-दिन बिगड़ती दशा को सुधारने की बजाय वो भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने की कोशिशों में लगा हुआ है। उसे शायद ये नहीं पता कि आग को हवा देने वाला भी एक दिन उसका शिकार हो जाता है।

बोल बिहार के लिए प्रीति सिंह

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