क्या आप सोनी को जानते हैं?

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Under 14 Indian Women Football Captain Soni
Under 14 Indian Women Football Captain Soni

बॉक्सिंग में पाँच बार की विश्व चैम्पियन मैरी कॉम, टेनिस स्टार सानिया मिर्जा, बेजाड़ बैडमिन्टन खिलाड़ी साइना नेहवाल – इन महिला खिलाड़ियों को आप जरूर जानते होंगे। जानना भी चाहिए। इन सबने दुनिया भर में अपने देश का नाम ऊँचा किया है। कितने ही पुरस्कार और सम्मान इन्हें मिल चुके हैं। मिलना भी चाहिए। मैरी कॉम तो आज संसद के उच्च सदन की सदस्य भी हैं। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए आप जाहिर तौर पर इस बात की सरहाना करेंगे। करनी भी चाहिए। लेकिन क्या आप सोनी को जानते हैं? राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टीम अंडर 14 की कप्तान सोनी कुमारी? संभवत: आपमें से ज्यादातर इसे नहीं जानते होंगे। ये दुर्भाग्य है चम्पारण की इस बेटी का और उससे भी अधिक बिहार का, भारत का।

देश से लेकर विदेश तक अपनी किक के जादू का लोहा मनवाने वाली सोनी बिहार के पश्चिम चम्पारण जिले के नरकटियागंज के प्रकाश नगर निवासी पन्नालाल पासवान की बेटी है। पन्नालाल पासवान तांगा चलाया करते थे लेकिन यातायात के नए साधनों के आ जाने से तांगा चलाकर घर चलाना मुश्किल होने लगा। अब वो पत्नी के साथ मजदूरी कर दो वक्त की रोटी जुटाते हैं और इन कठिन परिस्थितियों में भी अपनी बेटी के सपनों में पंख लगाते हैं। सुनकर शायद आपको हैरानी हो लेकिन जिस देश के कई खिलाड़ी केवल विज्ञापन से अरबों कमा रहे हों वहाँ सोनी जैसी खिलाड़ी भी है जो झोपड़ी में रहती है और शौच के लिए आज भी खुले में जाती है। जी हाँ, सोनी जिस जीर्ण-शीर्ण झोपड़ी में रहती है उसमें शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है।

किसे यकीन होगा कि जहाँ स्वच्छता मिशन प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है वहाँ उसकी ऐसी बदसूरत तस्वीर भी हो सकती है। पर विडंबना केवल यही नहीं। कहानी आगे भी है। अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी बनने के बाद पूरा प्रशासन सोनी के घर पहुँचा और ‘तत्काल’ शौचालय बनाने की बात कही। इस साल फरवरी में इसके लिए गड्ढ़ा भी खोद दिया गया मगर छह महीने बीत जाने के बाद भी प्रशासन का ‘तत्काल’ नहीं आया। कारण पूछने पर सरकारी अधिकारी बताते हैं कि सोनी के घर में नगर परिषद योजना मद से शौचालय निर्माण होना है और पैसा रिलीज नहीं होने के चलते इसमें इसमें देर हुई है।

नीतीशजी के राज में बिहार की बेटियाँ साइकिल से स्कूल जाने लगी हैं तो क्या शौच जाने के लिए भी वो उसी का प्रयोग करेंगी? क्या बहू-बेटियों के लिए शौचालय की व्यवस्था शराबबंदी से कम जरूरी है? क्या ‘नीतीश निश्चय’ में ये सबसे ऊपर नहीं होना चाहिए? चंद हजार रुपयों के रिलीज होने में छह महीने से ज्यादा का वक्त लगना क्या किसी भी तर्क से सही ठहराया जा सकता है? रही बात मोदीजी की, तो केन्द्र की उनकी सरकार अपने स्लोगन “जहाँ सोच वहाँ शौचालय” के प्रचार के लिए टीवी-रेडियो, पत्र-पत्रिका पर हर दिन करोड़ों खर्च कर सकती है लेकिन सोनी जैसी प्रतिभा के घर में शौचालय की त्वरित व्यवस्था हो इसके लिए उसके हाथ रीते दिखते हैं।

बहरहाल, नरकटियागंज हाईस्कूल में नौवीं की छात्रा सोनी भीषण गरीबी और तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद आज जहाँ भी है वो इस खेल के प्रति अपने जुनून और अपने कोच सुनील वर्मा के कारण। सुनील वर्मा मैदान में दूसरे छात्रों को प्रशिक्षण दे रहे होते और सोनी ये सब एकटक देखा करती। एक दिन उन्होंने सोनी से खेलने को कहा और फिर सोनी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। जिस सोनी के पास जूते खरीदने तक के पैसे नहीं थे वो अपनी नैसर्गिक प्रतिभा और जीतोड़ मेहनत की बदौलत जल्द ही अंडर 14 महिला फुटबॉल टीम की कप्तान बन गई। उसने श्रीलंका में भारतीय महिला टीम का प्रतिनिधित्व किया। नेपाल के एक अंतर्राष्ट्रीय मैच में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए 2015 में उसने बांग्लादेश को शिकस्त भी दी। क्या इतनी छोटी-सी उम्र में अपने राज्य और देश का नाम रोशन करने वाली सोनी की प्रतिभा और जुनून को हम बुनियादी सुविधाओं के अभाव में मुरझाने दे देंगे?

बोल बिहार के लिए रूपम भारती

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