पंचम सुरों को साधने वाले ‘पंचम दा’

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RD Burman
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राग जिसकी रगों में लहू बन कर दौड़ता था, संगीत जिसके प्राण थे और धुन जिसकी सांसें हुआ करती थीं उस ‘पंचम दा’ की आज 77 वीं जयंती है। महान् संगीतकार सचिन देव बर्मन और उनकी पत्नी मीरा के घर 27 जून 1939 को जब आरडी यानि राहुल देव बर्मन का जन्म हुआ तब किसी ने नहीं सोचा था कि इस बालक का संगीत पूरी दुनिया में इस कदर मशहूर होगा। आज दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संगीतकारों में आरडी बर्मन का नाम शुमार होता है। उनकी बेमिसाल शैली को कई संगीतकार अब भी कॉपी करते हैं।

आरडी बर्मन फिल्म इंडस्ट्री में ‘पंचम दा’ के नाम से मशहूर थे। उनका ये नाम मशहूर अदाकार अशोक कुमार का दिया हुआ था। अपने इस नाम को चरितार्थ करते हुए ‘पंचम दा’ ने सचमुच पंचम सुरों को साध लिया था। अपने पिता के उलट उन्होंने संगीत के साथ कई प्रयोग किए। भारतीय संगीत के साथ-साथ पाश्चात्य संगीत को मिलाकर पंचम दा ने कई अमर धुनों को ईजाद किया। 60, 70 और 80 के दशक में उनके संगीत ने लाखों लोगों को उनका दीवाना बना दिया था। अकारण नहीं है कि उन्हें हिन्दी फिल्मों में आधुनिक संगीत का जनक कहा जाता है।

फिल्म तीसरी कसम का रोमांटिक गीत ‘ओ मेरे सोना रे सोना रे सोना’ हो या पाश्चात्य धुन पर बना गीत ‘मोनिका ओ माई डार्लिंग’ या फिर विशुद्ध शास्त्रीय संगीत से रचा ‘रैना बीती जाये श्याम न आये’… आरडी बर्मन ने हर गीत में अपनी एक अलग छाप छोड़ी है। उनकी बनाई धुनों में सुनने वालों को मदहोश कर देने की अद्भुत क्षमता थी।

आरडी बर्मन ने अपने कैरियर की शुरुआत महज 9 साल की उम्र में फिल्म ‘छोटे नवाब’ से की। अपने चार दशक लंबे कैरियर में उन्होंने लगभग 300 से ज्यादा फिल्मों के लिए संगीत दिया। हिन्दी फिल्मों के अलावा उन्होंने बंगला, तेलुगू, तमिल, उड़िया और मराठी फिल्मों में भी अपने संगीत का जादू बिखेरा। बेमिसाल संगीत के लिए उन्हें तीन बार सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के फिल्म फेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया।

भारतीय और पाश्चात्य संगीत को मिलाकर नई धुनें बनाने के लिए पंचम दा जितने मशहूर हुए उतनी ही उनकी आलोचना भी की गई। लेकिन, इन सबकी परवाह किए बिना नित नए प्रयोग कर वो संगीत को नई ऊंचाईयों पर पहुंचाते रहे।

अपने व्यवसाय और रिश्ते को उन्होंने हमेशा एक-दूसरे से अलग रखा। तभी तो पिता सचिन देव बर्मन के साथ मनमुटाव के बाद भी उन्होंने प्रसिद्ध गायिका लता मंगेशकर को अपनी बनाई धुनों पर गीत गाने के लिए राजी कर लिया और घर के बाहर सीढ़ियों पर हारमोनियम रखकर गीत की रचना की। इस तरह उनकी पहली फिल्म ‘छोटे नवाब’ का ‘घर आजा घिर आये बदरा’ गीत बनकर तैयार हुआ।

अपने दोस्त और मशहूर शायर गुलजार के साथ मिलकर पंचम दा ने कई कालजयी गीतों की धुन तैयार की। आंधी, किनारा, परिचय, खुशबू, इजाजत, लिबास जैसी फिल्मों के गीत का संगीत तेज धुनों को नया आयाम देने वाले आरडी बर्मन के एक अलग रूप को दिखाता है। इन फिल्मों के गीत आज भी लोगों की जुबान पर हैं।

पंचम दा ने अपने गीतों में लोकसंगीत का भी भरपूर इस्तेमाल किया। बहुमुखी प्रतिभा के धनी इस संगीतकार ने जहाँ एक ओर फिल्म ‘बहारों के सपने’ के गीत ‘चुनरी संभाल गोरी उड़ी चली जाये रे’ जैसे गीतों से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के लोकसंगीत का बेहतरीन इस्तेमाल करके अपने आलोचकों को करारा जवाब दिया वहीं गैर फिल्मी संगीत के क्षेत्र में भी कई कीर्तिमान रचे। अमेरिका के मशहूर संगीतकार जोंस फ्लोरेंस के साथ उनके अलबम ‘पंटेरा’ ने लोकप्रियता के नए झंडे गाड़े।

अपने माता-पिता की इकलौती संतान आरडी बर्मन ने दो शादियां की थीं। पहली पत्नी रीता पटेल से तलाक के बाद उन्होंने साल 1980 में मशहूर गायिका आशा भोंसले से विवाह किया। बतौर संगीतकार ‘1942 ए लव स्टोरी’ उनकी आखिरी फिल्म थी। 4 जनवरी 1994 को दुनिया को अलविदा कहने वाले सुर के इस बेताज बादशाह को उनकी जयंती पर हमारा दिल से आभार। अगर वो नहीं होते तो कई मीठे गीत हम सबके जीवन से दूर रह जाते।

बोल बिहार के लिए प्रीति सिंह

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